अल्मोड़ा। पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश परेशानी का सबब बन गई है। लगातार हो रही भारी बारिश के चलते कुमाऊं और गढ़वाल के कई इलाकों को तराई से जोड़ने वाले रामनगर-मौलेखाल और रामनगर-रानीखेत मार्ग पर स्थित पन्याली गधेरा उफान पर आ गया। ऐसे में रामनगर-मौलेखाल मार्ग पर सैकड़ों वाहन जाम में फंस गए। जबकि रामनगर-रानीखेत मार्ग पर सीमाड़ी पड़ाव के पास एक पुल नाले के उफान से टूट गया। इससे कुमाऊं और गढ़वाल के कई इलाकों को आवाजाही करने वाले लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
पर्वतीय इलाकों में हो रही लगातार बारिश के कारण शनिवार को पन्याली गधेरा उफान पर आ गया। ऐसे में मौलेखाल, डोटियाल, सराईखेत और भिकियासैंण क्षेत्रों को आवाजाही ठप हो गई। मोहान से करीब दो सौ मीटर पहले सैकड़ों वाहन और यात्री फंस गए। गधेरे का प्रवाह इतना तेज था कि कोई भी वाहन चालक उसे पार करने की हिम्मत नहीं जुटा सका। नाले के दोनों ओर वाहनों की लंबी लंबी कतार लगी रही। हजारों यात्री पांच घंटे तक गधेरे का उफान कम होने का इंतजार करते रहे लेकिन इसका प्रवाह बढ़ता गया। कई वाहन चालक मौके से लौटे।
रामनगर-रानीखेत मार्ग पर भी इसी गधेरे के उफान के चलते सीमाड़ी पड़ाव के पास एक पुल क्षतिग्रस्त हो गया और इसमें दरारें पड़ गईं। रामनगर से भतरौंजखान, रानीखेत, अल्मोड़ा, चौखुटिया कर्णप्रयाग और गैरसैंण जाने वाले वाहनों की आवाजाही इस मार्ग पर ठप हो गई। मजबूरी में वाहन चालकों ने चिमटाखाल होते हुए गंतव्य तक पहुंचने की कोशिश की लेकिन रामनगर-मौलेखाल मार्ग पर उफनाए नाले ने इन वाहनों की रफ्तार पर भी ब्रेक लगा दिया। देर शाम उफान कुछ कम होने पर बड़े वाहन बमुश्किल नाले को पार कर सके जबकि छोटे वाहन चालकों को मजबूरी में यहां से वापस लौटना पड़ा। संवाद
बरसात में हर साल परेशानी का सबब बनता है गधेरा
बरसात के मौसम में पन्याली गधेरा हर साल परेशानी का सबब बनता है। गढ़वाल मंडल से निकलने वाला यह गधेरा मोहान के पास मौलेखाल और रानीखेत जाने वाले दो अलग-अलग मार्गों के बीच से होकर गुजरता है। रानीखेत मार्ग पर तो इस गधेरे पर आवाजाही के पुल बनाया गया था लेकिन मौलेखाल मार्ग पर यह गधेरा सड़क से होकर गुजरता है। इस गधेरे के उफान पर आने से पूर्व में भी कई हादसे हो चुके हैं।
लंबे समय से फ्लाई ओवर बनाने की हो रही है मांग
मोहान के पास स्थित पन्याली गधेरे पर लंबे समय से फ्लाई ओवर बनाने की मांग की जा रही है। पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत, सांसद अनिल बलूनी समेत कई नेता इसके लिए प्रयास भी कर चुके हैं। कई बार घोषणाएं भी की गईं लेकिन यहां फ्लाई ओवर का निर्माण नहीं हो सका है।