1952 में चुनाव प्रचार के लिए रानीखेत पहुंचे पं. नेहरू साथ में प्रख्यात स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। भले ही आज राजनीति मतभेद से मनभेद तक के स्तर पर पहुंच गई हो लेकिन आजाद भारत के बाद हुए कई चुनावों में सभी दलों के लोग आपसी सौहार्द और भाईचारे में यकीन रखते थे। चुुनाव प्रचार में सभी दलों के स्टार प्रचारकों को सुनने के लिए लोगों की भीड़ इकट्ठा हो जाती थी। 1952 के पहले आम चुनाव में प्रचार करने के लिए देश के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू रानीखेत पहुंचे। पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में उनकी जनसभा भिकियासैंण में आयोजित की गई। यहां सभी दलों के लोगों ने उनके विचारों को सुना। बताया जाता है कि भाषण देते वक्त नेहरू लोगों का स्नेह देखकर भावुक हो गए थे। तब रानीखेत विधानसभा क्षेत्र दो सीटों में विभक्त था-रानीखेत पूर्वी और रानीखेत दक्षिणी।
रानीखेत में चुनाव प्रचार के लिए देश की तमाम बड़ी राजनैतिक हस्तियां आ चुकी हैं। उस जमाने में लोक सभा और विधानसभा चुनाव साथ-साथ होते थे। 1952 के विस चुनाव में रानीखेत पूर्वी क्षेत्र में सोशलिस्ट पार्टी से कद्दावर नेता पूर्व मंत्री स्व. गोविंद सिंह माहरा और कांग्रेस से स्व. हरगोविंद पंत जबकि रानीखेत दक्षिणी से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. मदन मोहन उपाध्याय और कांग्रेस से स्व. हरिदत्त कांडपाल मैदान में थे। पं. नेहरू दिल्ली से कार से रानीखेत पहुंचे। यहां से भिकियासैंण गए। वहां उनकी चुनावी सभा हुई। लेकिन सभा में जुटी भीड़ में कांग्रेस की सफेद टोपी धारण करने वाले कम सोशलिस्ट पार्टी की लाल टोपी पहने लोग अधिक थे। उस चुनाव में सोशलिस्ट पार्टी के स्व. माहरा 80 वोटों से हार गए थे, लेकिन मदन मोहन उपाध्याय पांच वोटों के अंतर से चुनाव जीते थे।