अल्मोड़ा। गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान कोसी कटारमल के सूर्य कुंज अध्ययन केंद्र में जल्द शोधार्थी और पर्यटक ऊंचे मचान में बैठकर बर्ड वॉचिंग का लुत्फ उठा सकेंगे। पर्यटन विभाग ने सूर्य कुंज को ईको टूरिज्म जोन के रूप विकसित करने की योजना बनाई है।
संस्थान में पर्यटकों की सुविधाओं का विस्तार होगा तो यहां पर्यटन कारोबार को नए पंख लगेंगे।जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान स्थित सूर्य कुंज अध्ययन केंद्र को ईको टूरिज्म को हब बनाने की पहल शुरू हो चुकी हैं। प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधता से भरपूर यह क्षेत्र पक्षी प्रेमियों को हमेशा अपनी ओर आकर्षित करता है।
इसे देखते हुए पर्यटन विभाग ने सूर्य कुंज पर्यटन हब के रूप में विकसित करने की पहल शुरू की है। योजना को धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था ग्रामीण निर्माण विभाग को दी गई है। 35 लाख रुपये से सूर्य कुंज के मुख्य द्वार, टिकट काउंटर, हाईटेक शौचालय सहित पार्कों का सौंदर्यीकरण कार्य किया जाएगा। इसके साथ ही यहां बर्ड वॉचिंग के लिए एक मचान तैयार की जाएगी। शोधार्थियों और पर्यटकों के लिए मचान से हिमालयी प्रजाति के रंग बिरंगे पक्षियों का दीदार करना अलग अनुभव होगा। इस पहल से जिले में पर्यटन कारोबार को नई गति मिलेगी।
बटरफ्लाई पार्क को भी होगा सौंदर्यीकरण
योजना के तहत यहां बसे तितलियों के संसार बटरफ्लाई पार्क का भी सौंदर्यीकरण कार्य होगा। इस पहल से पार्क और भी अधिक आकर्षक लगेगा। जो देश-विदेश से तितलियों पर अध्ययन के लिए यहां पहुंचने वाले शोधार्थियों को अपनी ओर आकर्षित करेगा।
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साइन बोर्ड होंगे स्थापित
- सूर्य कुंज में औषधीय पौधों की कई प्रजातियां मौजूद हैं। लेकिन शोधार्थियों के लिए इन प्रजातियों की जानकारी जुटाना चुनौती बना रहता है। योजना के तहत अब यहां मौजूद हर वृक्ष और औषधीय पौधों पर साइन बोर्ड स्थापित किए जाएंगे साथ ही क्यूआर कोड में लगाया जाएगा। बोर्ड और क्यूआर स्कैन करते ही शोधार्थी पौधे का पूरा इतिहास जान सकेंगे।
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कोट
सूर्य कुंज को ईको टूरिज्म जोन के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए शासन से 35 लाख रुपये का बजट अवमुक्त हो चुका है। योजना के अस्तित्व में आने पर जिले को एक नई पहचान मिलेगी। वहीं पर्यटन कारोबार को गति मिलेगी
-प्रकाश सिंह खत्री, उपनिदेशक पर्यटन विभाग अल्मोड़ा