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मुख्य बाजार में खेलने की नहीं मिली अनुमति, मिठाई बांटकर मनाया खेल दिवस

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खेल दिवस पर गांधी चौक पर मेजर ध्यान चंद को श्रद्धांजलि देते खेल प्रेमी। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : RANIKHET
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। प्रशासन की ओर से खिलाड़ियों को मुख्य बाजार की सड़क पर खेलने की अनुमति नहीं मिली। जिला हॉकी संघ ने राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर गांधी पार्क में एकत्रित होकर हॉकी के जादूगर मेजर ध्यान चंद की जयंती पर उन्हें याद किया गया और मिठाई बांटी गई। खिलाड़ियों ने मेजर ध्यान चंद को भारत रत्न देने की मांग भी उठाई।
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अध्यक्षता करते हुए जिला हॉकी संघ के अध्यक्ष अगस्त लाल साह ने कहा कि मेजर ध्यानचंद का स्मरण करते हुए सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न देने की मांग की। रानीखेत में खेल मैदान की कमी को महसूस करते हुए इस बावत शासन-प्रशासन से कार्रवाई तेज करने का आग्रह किया गया। कहा कि खेल संघ आज खेल मैदान की कमी को लेकर सड़क पर खेल कर सरकार को संदेश देना चाहते थे लेकिन प्रशासन की लिखित अनुमति न मिलने के कारण कार्यक्रम नहीं हो पाया। कार्यक्रम में एनआईएस मनोज मेहरा की माता देवकी देवी के निधन पर भी दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम में कैलाश पांडे, हिमांशु उपाध्याय, किरन साह, मुकेश साह, अनिल वर्मा, खजान जोशी, महेश आर्या, दीपक मेहरा, हिमांशु रावत, पंकज बिष्ट, कौशल साह, सोनू सिद्धिकी, मनीष कन्नौजिया सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
पूर्व खिलाड़ी बोले मैदान बनने से होगी मेजर ध्यान चंद को असली श्रद्धांजलि
रानीखेत। रानीखेत के पूर्व खिलाड़ियों का कहना है कि आजादी के 75 सालों बाद भी अदद खेल मैदान उपलब्ध नहीं हो सका है। देश के खिलाड़ी विदेशों में नाम रोशन कर रहे हैं, लेकिन रानीखेत के खिलाड़ियों को मैदान के अभाव में उचित मंच नहीं मिल पा रहा है। हम लोग आज भी आजाद नहीं हैं। मेजर ध्यान चंद को असली श्रद्धांजलि तब होगी जब रानीखेत में खेल मैदान बनेगा।
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कोट.......
- रानीखेत में खेल मैदान का नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। देश के खिलाड़ी विदेशों में ओलंपिक में नाम रोशन कर रहे हैं। हमारी कई पीढ़ियां खेल मैदान की मांग करते करते बूढ़ी हो गई। मेजर ध्यान चंद को सबसे बड़ी श्रद्धांजलि तभी होगी जब बच्चों के लिए खेलने के लिए मैदान होगा। - हिमांशु उपाध्याय, पूर्व खिलाड़ी रानीखेत।
-बचपन से आज तक खेल मैदान के लिए लड़ते रहे हैं। अब उम्मीद भी कम ही है। कैबिनेट की घोषणा के बावजूद सरकार खेल स्टेडियम नहीं बना पा रही है। डबल इंजन की सरकार ने इसके लिए कोई प्रयास नहीं किए। मैदान के अभाव के बच्चों का मनोबल गिर रहा है। सड़क पर खेलकर सांकेतिक विरोध जताना चाह रहे थे, लेकिन प्रशासन ने अनुमति नहीं दी।-अगस्त लाल साह, अध्यक्ष जिला हॉकी संघ।
- भावी पीढ़ी के लिए जितनी पढ़ाई जरूरी है उतना ही खेलों का होना जरूरी है। युवा पीढ़ी के अंदर आत्मग्लानि होती है, जब सामान्य स्कूलों के बच्चों के लिए मैदान का अभाव रहता है और आर्मी और केंद्रीय विद्यालयों के बच्चों के लिए सेना के मैदान उपलब्ध हो जाते हैं। सेना से विशेष आग्रह है कि एनसीसी मैदान को तो कम से कम नागरिकों के लिए उपलब्ध कराए। वर्तमान सरकार को रानीखेत में भी खेल मैदान या स्टेडियम बनाना चाहिए। -कैलाश पांडेय, पूर्व खिलाड़ी, रानीखेत।
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