द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। विकासखंड के विमांडेश्वर मंदिर से एक किमी नीचे खुपइया रौ से बनी पैठानी नहर का लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है। पैठानी नहर बेढुली से आगे नहीं बढ़ सकी। इससे किसानों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात कर रही है, लेकिन यह नहर योजना की हकीकत बता रही है। लेटलतीफी का आलम यह है कि 30 साल में भी सात किमी लंबी नहर का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका।
वर्ष 1990 के दशक में सिंचाई विभाग ने खुपइया रौ से पैठानी नहर के नाम से सात किमी लंबी नहर स्वीकृत की। इसका पानी बेढुली, बाड़ी, बनोली, सिमलगांव, कांडे, सुनाड़ी, पैठानी तक पहुंचाने का लक्ष्य था लेकिन यह नहर मात्र 3.5 किमी ही बनी। इसमें भी मात्र एक किमी दूरी पर स्थित बेढुली के मात्र एक तोक तक ही पानी आ रहा है। इसकी सहायक नहरें अपर कांडे, लोअर कांडे, सिल्फोड़ी नहरें पानी के अभाव में सूख चुकी हैं जबकि इसे पैठानी तक बनाने की मांग उठती रही है।
क्षेत्रवासियों ने बताया कि वर्ष 2018-19 में पैठानी नहर का नाममात्र का जीर्णोद्धार किया गया था। पिछले साल भी नहर की मरम्मत और कुछ सफाई की गई थी लेकिन इस साल अक्तूबर में आई आपदा के कारण मुख्य नहर के हेड, फील्ड गूल सहित सहायक नहरों के सारे हेड टूट गए हैं। इस कारण साढ़े तीन किमी तक होने वाली सिंचाई ठप है। वहीं पैठानी के नाम से स्वीकृत इस नहर को पैठानी तक जोड़ने की वर्षों से की जा रही रिस्कन घाटी संघर्ष समिति की मांग भी नहीं सुनी जा रही है। इससे चिंतित ग्रामीणों ने बताया कि विमांडेश्वर बैराज के निर्माण का उद्देश्य पूरा नहीं हो सका और क्षेत्रवासियों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है जबकि यहां गेहूं, सरसों, मसूर आदि का उत्पादन होता है।
द्वाराहाट विकासखंड की सात नहरों के सुधारीकरण का प्रस्ताव नाबार्ड में भेजा गया है जबकि आपदा से क्षतिग्रस्त पैठानी नहर को सुधारने के लिए डेढ़ लाख रुपये का आगणन भी शासन को भेजा गया है।
-टीएस लटवाल, सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग द्वाराहाट।
बारिश के बाद गेहूं के खेतों में छाई हरियाली
गरुड़ (बागेश्वर)। रबी की फसल के लिए पर्याप्त बारिश होने से गेहूं के खेतों अब पूर्ण रूप से हरियाली आग गई है। असिंचित जमीन में बोये गये गेहूं के बीज में भी अंकुर आ गया है। बारिश रुकने के बाद कई किसान गेहूं के खेतों में रसायनों का छिड़काव करने लगे हैं। जनवरी के पहले सप्ताह में जमकर बारिश होने के बाद गेहूं के खेतों को नई ऊर्जा मिली है। किसान क्लब देवनाई के अध्यक्ष सुंदर बरोलिया, किशन राणा, दिगपाल भंडारी, चंदन बोरा का कहना है कि रबी की फसल को बारिश मिलती रहे तो इस बार गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन होगा।