प्रदेश सरकार का दावा है कि अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज में 2017 से कक्षाएं शुरू हो जाएंगी, लेकिन अब तक सिर्फ 25 प्रतिशत काम भी नहीं हो सका है और सरकार द्वारा मंजूर किए गए 66 करोड़ रुपये भी खर्च हो चुके हैं।
अगर अगले 15 दिन में धन स्वीकृत नहीं हुआ तो काम पूरी तरह ठप हो जाएगा। इस हालत में मेडिकल कॉलेज के भवनों का निर्माण तय समय सीमा में होना संभव नहीं लग रहा है।
प्रदेश की कांग्रेस सरकार चाहती है कि अल्मोड़ा में बनने जा रहे मेडिकल कॉलेज में कक्षाएं 2017 के चुनावों से पहले शुरू हो जाएं, लेकिन निर्माण में शुरू से ही व्यवधान आ रहा है दो साल में करीब 25 प्रतिशत काम ही हो सका है।
निर्माण कार्य उप्र निर्माण निगम द्वारा शुरू किया गया, लेकिन कुछ समय बाद यह काम सीएनसी कंस्ट्रक्शन कंपनी को सौंप दिया गया। जैसे ही इस कंपनी को काम मिला, छह माह तक निर्माण कार्य ही रुक गया।
विधायक मनोज तिवारी और जनप्रतिनिधियों के दबाव बनाने के बाद सीएनसी कंस्ट्रक्शन कंपनी से काम लेकर दोबारा उप्र निर्माण निगम को सौंप दिया गया। निर्माण निगम को काम मिलने के बाद से बीते दिनों काम की गति में तेजी आई थी, लेकिन अब धन की कमी आड़े आ गई है।
निर्माण निगम के अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश सरकार द्वारा स्वीकृत किया 66 करोड़ रुपये का बजट अब लगभग खत्म हो गया है और अगर अगले 15 दिनों में धनमंजूर नहीं हुआ तो काम ठप हो जाएगा।
इधर यह भी पता लगा है कि सरकार ने एक बार फिर निर्माण एजेंसी को बदल दिया है और अब बाकी का काम किसी अन्य कंस्ट्रक्शन कंपनी को दे दिया गया है।
नई कंस्ट्रक्शन कंपनी के लोग फिलहाल यहां नहीं पहुंचे हैं। नियमानुसार इस नई कंपनी को पहले 20 करोड़ रुपये जारी किए जाएंगे उसके बाद कंपनी का स्टाफ यहां आकर काम संभालेगा।
इस स्थिति के चलते एक बार भी निर्माण कार्य में बाधा आने की आशंका है और ऐसी हालत में मेडिकल कॉलेज के भवनों का निर्माण 2017 तक पूरा होेने की उम्मीद नहीं है।