अल्मोड़ा। चार साल पहले बरेली से पकड़े गए माओवादी खीम सिंह बोरा को शुक्रवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अल्मोड़ा की अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के बाद उसे 16 मार्च तक न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया है। गिरफ्तारी के समय बोरा पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था। शनिवार को उसे द्वाराहाट थाने में दर्ज एक मुकदमे की सुनवाई के लिए भी कोर्ट में पेश किया जाएगा।
यूपी एटीएस को 17 जुलाई को मुखबिर से सूचना मिली थी कि माओवादी खीम सिंह बोरा बरेली स्टेशन से धनबाद (झारखंड) जाने वाला है। एटीएस ने बरेली स्टेशन में घेराबंदी कर बोरा को गिरफ्तार कर लिया। तलाशी में बोरा से एटीएस ने 315 बोर का एक तमंचा, पांच कारतूस, नौ पर्चे, माओवादी आंदोलन से जुड़ीं चार पत्रिकाएं, एक जंगल सर्वाइकल किट और कुछ दवाएं बरामद कीं थीं। बोरा यूएस नगर, नैनीताल, अल्मोड़ा पुलिस का भी वांछित था। बोरा को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ एटीएस थाना गोमतीनगर लखनऊ में विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। बोरा को रिमांड पर लेकर यूएस नगर पुलिस ने भी पूछताछ की थी। शुक्रवार को सोमेश्वर थाने में दर्ज एक मुकदमे में बोरा को सीजेएम कोर्ट अल्मोड़ा में पेश किया गया। विवेचक/सीओ रानीखेत तपेश कुमार ने बताया कि कोर्ट से खीम सिंह बोरा को 16 मार्च तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। द्वाराहाट थाने के एक मुकदमे की सुनवाई के लिए शनिवार को भी बोरा को कोर्ट में पेश किया जाएगा।
खीम सिंह ने लीसा आंदोलन से की थी शुरुआत
अल्मोड़ा। खीम सिंह बोरा ने वर्ष 1984 में अल्मोड़ा जिले में हुए लीसा आंदोलन से आंदोलन की राह पकड़ी थी। इससे पहले भी बोरा विभिन्न किसान आंदोलनों का सक्रिय सदस्य रहा था। मूल रूप से हत्यूड़ा सोमेश्वर निवासी खीम सिंह ने वर्ष 1983 में जीआईसी सोमेश्वर से इंटर की परीक्षा पास की। इसके बाद एसएसजे परिसर अल्मोड़ा में बीएससी प्रथम वर्ष में प्रवेश लिया लेकिन उसका मन पढ़ाई की जगह छात्र आंदोलन में रमा और उसने पढ़ाई छोड़ दी। वर्ष 1984 में बोरा ने फिर इसी कॉलेज में बीए प्रथम वर्ष में प्रवेश लिया। तभी अल्मोड़ा में लीसा आंदोलन की शुरुआत हुई तो बोरा ने आंदोलन में सक्रिय होकर फिर पढ़ाई छोड़ दी। वर्ष 2003 में बोरा माओवादी केंद्रीय समिति से जुड़कर पूर्ण रूप से माओवादी गतिविधियों को अंजाम देने लगा।
इन लोगों को लाया था माओवाद की राह पर
अल्मोड़ा। माओवादी खीम सिंह बोरा ने महाराष्ट्र के प्रशांत सांगलेकर की मदद से अल्मोड़ा के दशाऊ गांव निवासी देवेंद्र चमियाल, लालकुआं निवासी रमेश भट्ट, गोपाल भट्ट, चंपावत निवासी अनिल चौड़ाकोटी, काशीपुर निवासी चंद्रकला तिवारी, अल्मोड़ा निवासी भगवती भोज को संगठन से जोड़ा। प्रशांत सांगलेकर को माओवाद के एक मुकदमे में महाराष्ट्र में आजीवन कारावास की सजा हुई।
इन गतिविधियों को दिया अंजाम
अल्मोड़ा। खीम सिंह बोरा ने जुलाई 2014 में नैनीताल जिले में हंसपुर खत्ते के जंगलों में 15 दिन तक एमसीसीआई-पीएलजीए का ट्रेनिंग कैंप चलाया, जिसमें मध्य प्रदेश से देशी हथियार बनाने के लिए दो विशेषज्ञ बुलाए गए, जिन्होंने ट्रेनिंग कैंप में ही छह हथियार तैयार किए। इसके बाद चंपारण, बिहार से ट्रेनिंग देने के लिए दो विशेषज्ञों को बुलाया गया। वर्ष 2012 और 2017 में विधानसभा और 2014 में लोकसभा चुनाव का बहिष्कार कर अल्मोड़ा क्षेत्र में वॉल राइटिंग कर पोस्टर चिपकाए गए। फरवरी 2016 में नैनीताल के एसडीएम का सरकारी वाहन जलाने का प्रयास किया। सोमेश्वर की विधायक के घर के बाहर पटाखे छोड़कर दहशत फैलाई गई। अप्रैल-मई 2017 में बोरा ने अल्मोड़ा, नैनीताल, बागेश्वर जिले में शराबबंदी, रोजगार, पलायन पर वॉल पेंटिंग कर पोस्टर चिपकाए।
इन क्षेत्रों में रहीं थी गतिविधियां
अल्मोड़ा। खीम सिंह बोरा ने अपने साथियों संग सितारगंज, खटीमा, अल्मोड़ा जिले के सोमेश्वर, बाड़ेछीना, शहरफाटक, नैनीताल जिले के धारी, लालकुुुआं, चोरगलिया, पहाड़पानी क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों को अंजाम दिया था। अल्मोड़ा के बिनसर वन्यजीव अभयारण्य, सोमेश्वर के बोरारौ घाटी आंदोलन में भी खीम सिंह की सक्रिय भूमिका रही थी।
माओवादी खीम सिंह बोरा के खिलाफ अल्मोड़ा जिले के सोमेश्वर और द्वाराहाट थाने में मुकदमे दर्ज हैं, जिसके लिए शुक्रवार को बोरा को सीजेएम कोर्ट अल्मोड़ा में पेश किया गया। कोर्ट के आदेश पर खीम सिंह बोरा को 16 मार्च तक न्यायिक हिरासत में लिया गया है। बोरा से पूछताछ के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। - तपेश कुमार, विवेचक/ सीओ रानीखेत।