अल्मोड़ा। राजकीय संग्रहालय अल्मोड़ा में सात साल पहले तक ऐतिहासिक और दुर्लभ मूर्तियों की प्लास्टर ऑफ पेरिस से अनुकृतियां बनाकर पर्यटकों को कम दामों में उपलब्ध कराई जाती थी। पर्यटक इन मूर्तियों को ले जाकर अपने घरों में सजाते थे। इससे दुर्लभ मूर्तियों के संरक्षण के लिए जनचेतना भी जागती थी लेकिन पिछले करीब दस साल से मूर्ति की प्रतिकृतियां बनाने वाले मॉड्यूलर का पद खाली पड़ा है और अब यहां प्रतिकृतियां नहीं बनाई जाती हैं। जिससे संग्रहालय का महत्व भी घट रहा है।
राजकीय संग्रहालय अल्मोड़ा में कई दुर्लभ मूर्तियां प्रदर्शित हैं। मूर्तियों में दिलचस्पी रखने वाले कई पर्यटक भी इन्हें देखने के लिए यहां आते हैं। करीब सात-आठ साल पहले तक संग्रहालय में इन दुर्लभ मूर्तियों की अनुकृतियां बनाकर पर्यटकों को काफी कम दामों में उपलब्ध कराई जाती थी। संग्रहालय में तैनात मोड्यूलर प्लास्टर ऑफ पेरिस को मूर्तियों के सांचों में ढालकर मूर्तियों की हू-ब-हू अनुकृतियां तैयार करता था।
यह मूर्तियां वास्तविक मूर्तियों जैसी ही लगती थी। पर्यटक इन मूर्तियों को ले जाकर अपने घरों में सजाते थे। इससे लोगों में दुर्लभ मूर्तियों के संरक्षण के लिए भी जागरूकता हुआ करती थी। साथ ही संग्रहालय का महत्व भी बढ़ता था लेकिन पिछले सात-आठ सालों से मूर्तियों की अनुकृतियां बनाने का काम ठप हो गया है।
इसका कारण यह है कि राजकीय संग्रहालय में मॉड्यूलर का पद 2009 से खाली पड़ा है। पुरविद कौशल किशोर सक्सेना बताते हैं कि उत्तर प्रदेश के लखनऊ, झांसी, मथुरा के राजकीय संग्रहालयों में आज भी मूर्तियों की अनुकृतियां लोगों को उपलब्ध कराई जाती हैं। अल्मोड़ा के संग्रहालय में भी यह काम दोबारा शुरु किया जाना चाहिए।
राजकीय संग्रहालय अल्मोड़ा के प्रभारी ज्ञानप्रकाश तिवारी ने बताया है कि संग्रहालय में तैनात मॉड्यूलर प्रदीप कुमार श्रीवास्तव 2009 से ड्यूटी पर नहीं आए हैं। कई बार उनके घर लखनऊ स्थित स्थायी निवास में पत्र भेजे गए लेकिन कोई जवाब नहीं आया। बाद में समाचार पत्रों में सूचना भी जारी करने के बावजूद मॉड्यूलर के बारे में कुछ जानकारी नहीं मिल सकी है। उन्होंने कहा कि मॉड्यूलर न होने से मूर्तियों की अनुकृतियां नहीं बन पा रही हैं।