अल्मोड़ा। लमगड़ा ब्लॉक का गणाऊं गांव सात दिनों तक लोक आस्था, भक्ति और संस्कृति के रंग में सराबोर रहा। ग्राम पंचायत भवन में आयोजित भव्य गौरा महोत्सव का समापन मां गौरा और भगवान महेश के डोले की पारंपरिक शोभायात्रा के साथ हुआ।
देव नौले में प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान महिलाओं की आंखें नम हो गईं। वहीं झोड़ा-चांचरी और लोकगीतों पर थिरकते ग्रामीणों ने माहौल को भावपूर्ण और उत्सवमय बना दिया। महोत्सव के दौरान महिलाओं ने व्रत रखकर विधि-विधान से मां गौरा और भगवान महेश की पूजा-अर्चना की। प्रतिमाओं की आरती उतारने के साथ महिलाओं ने पारंपरिक गौरा गीत और भजनों का गायन किया।
‘पैर-पैर गौरा नौ लखिया हार...’, ‘ओ फूल हजारी को फूल त्वै फूल देवी चढ़ूंला...’ और ‘मैं किले ब्याही बौज्यू यो ऊंचा हिमाला डाणा...’ जैसे पारंपरिक गीतों से गांव का वातावरण भक्तिमय बना रहा। महिलाओं ने भजनों के साथ नृत्य भी किया। समापन अवसर पर ‘खोल दे माता खोल भवानी धरम किवाड़ा’ समेत विभिन्न झोड़ों का गायन हुआ।
पारंपरिक लोकगीतों और झोड़ा-चांचरी ने उत्तराखंड की लोक संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत की। इसके बाद मां गौरा और भगवान महेश के डोले की शोभायात्रा निकाली गई। ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ देव नौले में प्रतिमाओं का विसर्जन किया।
ग्रामोत्थान सेवा समिति गणाऊं के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद भट्ट ने बताया कि व्रतधारी महिलाएं धान, गेहूं आदि के पौधों से भगवान महेश और मां गौरा की प्रतिमाएं तैयार करती हैं। मान्यता है कि निसंतान महिलाएं श्रद्धा और भक्तिभाव से इन प्रतिमाओं को झुलाती हैं तो उन्हें संतान की प्राप्ति होती है।
महोत्सव और शोभायात्रा में ये रहे शामिल
महोत्सव और डोले की शोभायात्रा में रेखा भट्ट, सीता भट्ट, नीमा भट्ट, माधवी जोशी, चंपा जोशी, कविता जोशी, प्रियंका भट्ट, ललिता भट्ट, पूजा भट्ट, सरिता जोशी, राधिका भट्ट, जानकी भट्ट, इंद्रा देवी, मोहनी देवी, पदमा भट्ट, अनिल भट्ट, नंदाबल्लभ भट्ट, रमेश भट्ट और ग्राम प्रधान नवीन भट्ट समेत ग्रामीण शामिल रहे।