लीज नवीनीकरण कर का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। लाखों-करोड़ों रुपये के नोटिस आने के बाद कैंट क्षेत्र में रह रहे लीज धारकों में भारी आक्रोश है। आक्रोशित नागरिकों ने यहां नगर में प्रदर्शन कर इस नीति का विरोध किया। इसे तुगलकी फरमान बताते हुए संघर्ष के लिए व्यापक रणनीति भी तय की गई। मालूम हो कि लीज धारकों को नवीनीकरण कर के रूप में छावनी परिषद की तरफ से लाखों-करोड़ों के नोटिस आ रहे हैं। यह धनराशि लीज धारकों को तीन माह में जमा करनी है।
यहां शिव मंदिर सभागार में हुई बैठक में लीज धारक एसोसिएशन, व्यापार मंडल पदाधिकारी सहित नागरिकों ने भाग लिया। वक्ताओं ने कहा कि आजादी से पहले छावनी क्षेत्र में अंग्रेज हुक्मरानों ने न्यूनतम दरों पर भूमि लीज पर आवंटित की थी। आजादी के बाद कई लीजें समाप्त हो गई हैं। लीज खत्म होने से पहले ही लीज धारकों ने नवीनीकरण के लिए आवदेन कर दिए थे, लेकिन रक्षा मंत्रालय और रक्षा संपदा विभाग ने इन मामलों को लटकाए रखा।अब नई लीज नीति घोषित कर दी गई है। जिसके तहत छावनी परिषद द्वारा लीज नवीनीकरण कर के रूप में लीजधारकों को लाखों, करोड़ों रुपये जमा करने के नोटिस जारी किए गए हैं, इस नीति का विरोध होगा।
लीज एसोसिएशन के अध्यक्ष सेवानिवृत्त ले. जनरल मोहन चंद्र भंडारी ने इसे तुगलकी फरमान बताया। कहा कि एकमुश्त लाखों, करोड़ों रुपये के नोटिस थमा देना समझ से परे हैं, जबकि लोग भूमि का किसी भी तरह से व्यावसायिक उपयोग नहीं कर रहे हैं। वक्ताओं ने कहा कि गरीब, किसान इतनी बड़ी धनराशि देने में कतई समर्थ नहीं हैं। इसके बाद दर्जनों लीज धारकों और व्यापारियों ने नगर में जुलूस प्रदर्शन किया और छावनी परिषद के खिलाफ भी नारेबाजी की गई। इस अवसर पर व्यापार मंडल जिलाध्यक्ष मोहन नेगी, नगर अध्यक्ष भगवंत नेगी, महामंत्री हर्ष पंत, अनूप शाह, गिरीश भगत, बीएल शाह, जोगेंद्र बिष्ट, सीएस बिष्ट, हिमांशु उपाध्याय आदि ने विचार रखे।