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कृषि विज्ञान केंद्र मटेला ने तैयार की तीन लाख सब्जी पौध

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अल्मोड़ा। लॉकडाउन अवधि में कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) मटेला (कोसी) किसानों की मदद के लिए आगे आया है। केवीके ने पर्वतीय क्षेत्रों में उगाई जाने वाली व्यवसायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सब्जियों की तीन लाख पौध तैयार की है, जो कि क्षेत्र के लिए उत्पादकता और गुणवत्ता की दृष्टि से उपयुक्त हैं।
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सब्जियों की पौध लगाने का सीजन शुरू हो गया है। केवीके प्रभारी डॉ. एसएस सिंह ने बताया कि मई प्रथम सप्ताह तक सब्जियों की पौध लगाई जाती है। इसलिए केवीके ने मटेला स्थित परिक्षेत्र में शिमला मिर्च, टमाटर, करेला, लंबी लौकी, गोल लौकी, तोरई, खीरा की करीब तीन लाख पौध उगाई है। इच्छुक किसान मटेला स्थित केवीके से निर्धारित मूल्य पर सब्जी पौध खरीद सकते हैं। केवीके किसानों को प्रशिक्षण भी देता है। केंद्र के प्रभारी डॉ. एसएस सिंह ने बताया कि व्यावसायिक खेती करने वाले किसान कम समय में अच्छी आय प्राप्त कर सकते हैं। यहां की जलवायु में उत्पादित सब्जियां से पोषण सुरक्षा में भी मदद मिलेगी। अन्य लोग भी अपने घरों के आसपास सब्जियां उगाकर परिवार की जरूरत के अनुरूप सब्जी उगा सकते हैं। इससे मैदानी क्षेत्रों से आ रही सब्जियों पर निर्भरता भी कम होगी।
बिल्लेख में उगाई पांच फुट सात इंच ऊंची धनिया की पौध
अल्मोड़ा। ताड़ीखेत विकासखंड के ग्राम पंचायत बिल्लेख निवासी प्रगतिशील किसान गोपाल दत्त उप्रेती जैविक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं। अपने फार्म हाउस में उद्यानीकरण के साथ ही मसाले की भी खेती कर रहे हैं। वह फसलों में केमिकल का छिड़काव नहीं करते हैं। बिल्लेख के जीएस ऑर्गनिक फार्म में 10 नाली (0.2 हेक्टेयर) क्षेत्र में धनिया और लहसुन की खेती की गई है जबकि 70 नाली (1.5 हेक्टेयर) में सेब का बागान लगाया गया है। इसमें सब्जी भी उगाई गई है। उनके खेत में धनिया के पौधे औसत से काफी ऊंचे हैं। इसलिए डीएचओ त्रिलोकी नाथ पांडे और विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान के वैज्ञानिक डॉ. गणेश चौधरी ने भी इस फार्म का निरीक्षण किया। बताया कि गोपाल ने धनिया की स्थानीय प्रजाति की बुवाई की है। उनके खेत में धनिया के पौधे औसतन पांच फुट तक ऊंचे हैं। धनिया के सबसे बड़े पौधे की ऊंचाई पांच फुट सात इंच है। पेशे से सिविल इंजीनियर गोपाल ने अधिकारियों को बताया कि धनिया पैदावार के डॉक्यूमेंटेशन के लिए उन्होंने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड के अधिकारियों से भी संपर्क किया है।
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अप्रैल में फरवरी का जैसा मौसम, फसल नहीं काटने दे रही बारिश
गरुड़ (बागेश्वर)। अप्रैल में फरवरी का जैसा मौसम होने से सुबह, शाम ठंड है। बेमौसमी बारिश के कारण गेहूं की फसल कटाई भी बाधित हो रही है। एडीओ कृषि कृषि पवन कुमार ने गेहूं की फसल पक गयी है। उन्होंने किसानों से धूप में ही फसल काटने का सुझाव दिया है। इसके बावजूद उन्होंने गेहूं के रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद जताई है।
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