रानीखेत/द्वाराहाट। पाली पछाऊं के ऐतिहासिक स्याल्दे बिखौती मेले में इस बार स्वरचित और संदेशपरक झोड़ों की धूम मची रही। पहाड़ से बढ़ते पलायन पर कलाकारों ने जहां ‘आहा च्याल ब्वारियां दिली न्है गेई, घर रै गो छ बुढ़’ झोड़ा तैयार किया है कि तो प्रदेश की समसामयिक राजनीति ‘भाजपा है गे सटबटुवा, कांग्रेस है गे जालि’ जैसे झोड़ों के माध्यम से कटाक्ष किया। लोक कलाकार बढ़ते शराब और जुए के प्रचलन पर भी करारा प्रहार करने से नहीं चूके।
स्याल्दे बिखौती मेला पाली पछाऊं का ऐतिहासिक मेला है, प्राचीन काल से ही झोड़ा गायन इस मेले का मुख्य आकर्षण रहा है। इस ऐतिहासिक मेले के माध्यम से समाज को जागरूक करने के लिए ही इस बार स्वरचित झोड़ों का प्रयोग किया गया। राजनीति दलों पर कटाक्ष किए गए।
मेला समिति के प्रचार सचिव गोविंद सिंह अधिकारी ने पर्यावरण संरक्षण के लिए ‘ओ दीदी तुम डाई निकाटे छम छमा, डाव काटी पापा लागुछ छम छमा’, लीलाधर कांडपाल ने पहाड़ के पलायन पर चिंता जताते हुए कहा कि ‘आहा च्याल ब्वारियां दिल्ली न्है गेई, घर रै गो छ बुढ़, खेती बाडी य बांजी हैगे छ, खाली है गई कुड़’, बालिका शिक्षा पर झोड़े तैयार किए गए थे।