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किसी बारूद से कम नहीं ये लीसे के टिन

Tue, 03 May 2016 10:28 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
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लीसा के टिन। - फोटो : अमर उजाला
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 ब्लाक कार्यालय से लगे लीसा डिपो में रखे 24 हजार लीसे से भरे टिन बस्ती के लिए कभी भी तबाही का कारण बन सकते हैं। जंगलों में आग की बढ़ती घटना को देखते हुए निकटवर्ती क्षेत्रों के लोग अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंतित हैं। लीसे की  सुरक्षा में लगे कर्मचारी भी सुरक्षा को लेकर परेशान हैं। 

ब्लाक कार्यालय और पशु चिकित्सालय से लगे वन विभाग के लीसा आयात-निर्यात डिपो में रखे 24 हजार लीसे से भरे टिन थोड़ी भी असावधानी होने पर निकटवर्ती क्षेत्रों के लोगों के लिए तबाही का कारण बन सकते हैं। डिपो के एक छोर में सरकारी कार्यालय तो दूसरे छोर पर रतनपुर की बस्ती है।
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डिपो का ऊपरी भाग जंगल से लगा है। ऐसी स्थिति में किसी भी छोर से आग की चिंगारी उठने पर पूरे डिपो के साथ ही निकटवर्ती कार्यालयों व बस्तियों में भारी तबाही हो सकती है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इससे पहले गर्मी के सीजन में इतनी मात्रा में लीसे के भरे टिन डिपो में कभी नहीं रहे।

अधिकारियों का कहना है कि पहले लीसे से भरे टिन बाहर बड़े डिपो में भेज दिए जाते थे, लेकिन वहां भी डिपो में जगह नहीं होने से टिनों की आगे के लिए निकासी नही हो पा रही है। इधर आग की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए डिपो के निकट रहने वाले लोग सुरक्षा को लेकर खासे चिंतित नजर आ रहे हैं। 
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कोट----
डिपो की सुरक्षा के लिए तीन विभागीय कर्मचरियों के अलावा तीन श्रमिकों को तैनात किया गया है। पिछले सालों तक लीसे के टिन हनुगढ़ी और सुल्तान नगरी डिपो में भेज दिए जाते थे, परंतु इस बार वहां जगह न होने से निकासी नहीं हो पा रही है। लीसे से भरे टिनों की सुरक्षा को लेकर सभी चिंतित हैं। टिनों को हटाने के लिए निकटवर्ती लोगों का भी दबाव पड़ रहा है। डिपो में वर्तमान में लीसे से भरे चौबीस हजार टिन हैं।
चंद्रशेखर त्रिपाठी
इंचार्ज लीसा आयात-निर्यात डिपो चौखुटिया
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