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संस्कृति के अभाव में व्यक्ति संस्कार शून्य : चौहान

Mon, 20 Nov 2017 10:45 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा
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सेमिनार में मौजूद विधान सभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह। - फोटो : अमर उजाला
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 कुविवि एसएसजे परिसर में औपनिवेशिकवाद से भारतीय मानस की मुक्ति विषय पर चल रहे सेमिनार का समापन हो गया। सेमिनार के अंतिम चरण में उत्तराखंड की लोक संस्कृति की झलक का प्रस्तुतीकरण किया गया। विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान ने कहा कि प्राण तत्व प्रदान करने वाली संस्कृति ही है और इसके अभाव में व्यक्ति संस्कार शून्य हो जाता है।
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 देवभूमि विचार मंच और कुविवि की ओर से आयोजित सेमिनार के अंतिम चरण की अध्यक्षता करते हुए विधानसभा उपाध्यक्ष ने कहा कि व्यक्ति को अपने स्व का भान रखना चाहिए। जिसकी अनुपस्थिति में हम समाज और राष्ट्र की मुख्यधारा से कट जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन किए जाने चाहिए और यह मील का पत्थर साबित होंगे। इससे पूर्व गढ़वाल विवि के प्रो. डीआर पुरोहित ने कुमाऊं और गढ़वाल के जौनसार-भाबर की संस्कृति के बारे में प्रस्तुतीकरण देते हुए लोक साहित्य को संगीत के माध्यम से उजागर करने का प्रयास किया। प्रो.एसए हामिद ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर के सेमिनार के आयोजनों में उठने वाले मुद्दों से हम अपने साहित्य, कला, संस्कृति, संविधान, विज्ञान पर गर्व महसूस कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन व्यक्ति के भीतर राष्ट्रवाद का उदय कराते हैं। इस मौके पर शोधार्थियों ने भी अपने शोध और आलेखों का प्रस्तुतीकरण किया। समापन कार्यक्रम में प्रज्ञा प्रवाह के क्षेत्रीय संगठन मंत्री भगवती प्रसाद, देवभूमि विचार मंच के जिला संयोजक डा. हरीश जोशी, राष्ट्रीय संगोष्ठी के संयोजक डा. नवीन चंद्र भट्ट, प्रो. इला साह, डा. तेजपाल सिंह, डा. नंदन बिष्ट, डा. चैतन्य भंडारी, डा. ललित जोशी, चंद्रशेखर रावत, प्रो. विजय पांडे, प्रो. बीडीएस नेगी, डा. मुकेश सामंत, डा. सोनू द्विवेदी समेत काफी संख्या में लोग मौजूद थे।
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