अल्मोड़ा जिले के रानीखेत तहसील के दूरस्थ ऐना गांव के तोक ऐनापार के ग्रामीणों की पीड़ा इसी सप्ताह तब उजागर हुई जब दो मरीजों को डोली में बिठाकर सड़क तक लाना पड़ा। इस गांव की आज तक सड़क की मुराद पूरी नहीं हो सकी। 300 की आबादी वाली यह अनुसूचित जाति बहुल बस्ती 78 वर्षों बाद भी सड़क का इंतजार करती रह गई।
तोक से करीब तीन किमी पैदल चलने के बाद मुख्य सड़क मिलती है। इसी असुविधा से गांव से 38 परिवार पलायन कर चुके हैं। पिछले एक सप्ताह के भीतर ही दो मरीजों को ग्रामीण बमुश्किल डोली में बिठाकर सड़क तक लाए। बीते बुधवार को गांव के केशव राम की तबीयत अचानक बिगड़ गई जिन्हें युवाओं ने डोली में बैठाकर सड़क तक पहुंचाया और फिर वाहन से अस्पताल पहुंचाया। इसके अगले ही दिन मुन्नी देवी की तबीयत खराब हो गई तो ग्रामीणों को उसे भी डोली से सड़क तक लाना पड़ा। उसे उपचार के लिए रानीखेत उप जिला चिकित्सालय पहुंचाया। सबसे बड़ी चुनौती तब आती है जब रात के अंधेरे में किसी मरीज को डोली में सड़क तक लाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से गुहार लगाने के बावजूद सड़क निर्माण का कार्य नहीं हुआ है। चुनावों के दौरान अनेक वादे किए जाते हैं लेकिन हकीकत यह है कि आज भी ग्रामीण सड़क जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित है।
चुनाव पूर्व का वादा भूला प्रशासन
लोकसभा चुनाव से पहले ऐनापार गांव के ग्रामीणों ने सड़क निर्माण नहीं होने पर चुनाव बहिष्कार की चेतावनी दी थी। प्रशासन के हस्तक्षेप और आश्वासन के बाद ग्रामीण मान गए। उन्होंने वोट भी डाला लेकिन चुनाव के बाद प्रशासन अपना वायदा भूल गया। सड़क बनना तो दूर इसके लिए पहल भी नहीं चल सकी।
क्या बोले लोग
हर बार वायदे होते हैं लेकिन हकीकत में कोई सुनवाई नहीं होती। गांव में अब तक 38 परिवार पलायन कर चुके हैं। जो बचे हैं, वे भी असुविधाओं और अनदेखी के बीच जैसे-तैसे जीवन गुजारने के लिए मजबूर हैं।
-प्रकाश चंद्र, ग्रामीण
बीमार हो या गर्भवती, सड़क न होने से हर स्थिति में जान पर खतरा रहता है। मरीज को पीठ पर ढोना ग्रामीणों की मजबूरी बन चुकी है। समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण कई बार जान जोखिम में पड़ जाती है।
-चंदन राम, ग्रामीण
हम वोट डालते हैं पर हमारे लिए न सड़क, न विकास। सरकारें आती-जाती रहीं लेकिन ऐनापार आज भी वहीं खड़ा है, जहां दशकों पहले था।
-रमेश राम, ग्रामीण
ऐना गांव की सड़क के निर्माण में वन भूमि का पेंच फंसने के कारण कार्य में देरी हो रही है। वन भूमि हस्तांतरण की फाइल प्रस्तुत कर दी है और शीघ्र इसे मंजूरी मिलने के बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी।
-राहुल आनंद, संयुक्त मजिस्ट्रेट रानीखेत