रामगंगा को बचाने का संकल्प लेते लोग।
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रामगंगा नदी का अस्तित्व बचाने के लिए लोग जागरूक होने लगे हैं। इसी को लेकर रामगंगा सेवा समिति की पहल पर अगनेरी मंदिर के निकट रामगंगा के तट पर हुई बैठक में लोगों ने गंगा जल हाथ में लेकर रामगंगा को बचाने और नदी के निकट के क्षेत्रों में व्यापक पौधरोपण करने का संकल्प लिया। इस मौके पर हुई चिंतन बैठक में कहा गया कि मानव जीवन बचाने के लिए रामगंगा और उसके सहायक गधेरों को बचाना होगा। कहा गया कि गंगा तभी बचेगी जब जल, जंगल और जमीन बचेंगे।
पेयजल को लेकर बढ़ते जा रहे हाहाकार और सिकुड़ती रामगंगा का दर्द अब लोगों से नहीं देखा जा रहा है। क्षेत्र के जागरूक लोग भविष्य के खतरे को भांपते हुए रामगंगा का महत्व समझने लगे हैं। इसी के चलते रामगंगा को बचाने की पहल शुरू हो गई है। क्षेत्र के लोगों ने रामगंगा सेवा समिति की पहल पर अगनेरी मंदिर के निकट रामगंगा के तट पर आयोजित बैठक में रामगंगा को बचाने के लिए रूपरेख तय की।
बैठक में समाज सेवी डॉ. कुलदीप सिंह बिष्ट ने कहा कि रामगंगा को बचाने के लिए धरातल पर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि इस बार उनकी टीम सावन में कांवर यात्रा पर जाने के बजाए रामगंगा बचाओ पद यात्रा निकालेगी।
कार्यक्रम के संयोजक एलडी मठपाल ने बैठक के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए लोगों से रामगंगा को बचाने के लिए आगे आने को कहा। बैठक में सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य दीवान सिंह बिष्ट ने कहा कि रामगंगा को प्रदूषण मुक्त करने के साथ ही पौधरोपण पर ध्यान दिया जाना चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि अवैध खनन और जंगलों में बढ़ रही आग की घटनाओं के चलते नदी सिकुड़ती जा रही है।
अध्यक्षता दीवानसिंह बिष्ट और संचालन लीलाधर मठपाल ने किया। वहां पूर्व प्रमुख नंदन संगेला, बीरेंद्र बिष्ट, डॉ. कुलदीप बिष्ट, हेम कांडपाल, जीवन नेगी, राजेंद्र कांडपाल, पूरन संगेला, भूपेंद्र बिष्ट, कैलाश सिंह, दानसिंह मनराल, गोविंद मनराल, मोहन सिंह आदि ने विचार रखे।