अल्मोड़ा। वनाग्नि से चार दिन से शांत जंगल फिर से धधकने लगे हैं। इससे वन विभाग, प्रशासन और आम लोगों की चिंता बढ़ने लगी है। नगर के नजदीक पातालदेवी के साथ ही बाड़ेछीना में जंगल में आग लग गई। सूचना के बाद फायर सर्विस की टीम ने आग पर काबू पाया और इसे आबादी में पहुंचने से रोका।
जिले में इस फायर सीजन नगर से लेकर गांवों तक वनाग्नि ने कहर बरपाया। यहां इस फायर सीजन 149 घटनाओं में 275 हेक्टेयर जंगल जलकर खाक हो गए। सुलगते जंगलों को सुरक्षित बचाने में वन विभाग के पसीने छूट गए और उसे बारिश का इंतजार था। बीते बुधवार को जिले भर में हुई बारिश के बाद जंगलों की आग शांत होने से वन विभाग ने राहत की सांस ली। उम्मीद थी कि मौसम का साथ मिलने से अब जंगलों की आग शांत होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। सिर्फ चार दिन बाद ही विभाग की उम्मीदों पर पानी फिर गया।
रविवार को नगर के नजदीक पातालदेवी के पास और बाड़ेछीना में अचानक जंगल में आग लग गई। देखते ही देखते आग आबादी की तरफ बढ़ने लगी तो स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना फायर सर्विस को दी। तत्परता दिखाते हुए फायर सर्विस की टीम ने मौके पर दौड़ लगाई। सूचना के बाद वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची और आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद किसी तरह आग पर काबू पाया गया। इन घटनाओं में आधे हेक्टेयर से अधिक जंगल जल गया, इससे वन संपदा को नुकसान पहुंचा है। अग्निशमन अधिकारी महेश चंद्रा ने बताया कि दोनों जगह आग पर काबू पा लिया गया। संवाद
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वनाग्नि की घटनाओं पर लापरवाह कर्मियों पर होगी कार्रवाई
गरुड़ (बागेश्वर)। प्रमुख वन संरक्षक और नोडल अधिकारी वनाग्नि प्रबंधन बागेश्वर जीएस पांडे ने वन प्रभाग बागेश्वर के वनाग्नि के संवेदनशील केंद्रों और विभिन्न क्रू स्टेशनाें का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने डीएफओ को लापरवाह वन कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए ।
प्रमुख वन संरक्षक पांडे ने वन प्रभाग बागेश्वर के बैजनाथ, गढ़खेत, बागेश्वर, धरमघर, कपकोट के रेंज आफिसर से आग से हुई क्षति की जानकारी ली। उन्होंने जंगलों को आग से बचाने के लिए वन विभाग के अधिकारियों से ग्रामीणों से अच्छा व्यवहार बनाने को कहा। निरीक्षण के दौरान उप प्रभागीय वनाधिकारी सुनील कुमार, वन रेंज सुरेंद्र सिंह नेगी, श्याम सिंह करायत, हरीश खर्कवाल, प्रदीप कांडपाल आदि थे। संवाद