रानीखेत (अल्मोड़ा)। वन बीट अधिकारी संघ अल्मोड़ा जिला इकाई ने विभाग में मृतक आश्रितों को वन दरोगा पद पर दी जा रही नियुक्ति का पुरजोर विरोध कर दिया है। कहा कि अनुकंपा के बजाय पद को अधिकार पद बना दिया गया है, इससे बीट अधिकारियों का मनोबल टूट रहा है और उनकी प्रोन्नति नहीं हो पा रही है। कार्यक्रम में नए वन आरक्षियों का स्वागत किया गया।
वन बीट अधिकारियों की बैठक में विभाग की नीतियों के खिलाफ जमकर आक्रोश जताया गया। कहा कि मृतक आश्रितों का वन दरोगा पद पर नियुक्ति दी जा रही है, जिस कारण पात्र बीट अधिकारी प्रोन्नति की राह तक रहे हैं। सौनी में हुई बैठक के मुख्य अतिथि वन बीट अधिकारी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष हर्षवर्धन गढ़िया ने वन कर्मियों की समस्याएं सुनीं और निराकरण का आश्वासन दिया। प्रांतीय कार्यकारिणी सदस्य अतुल भगत ने समस्याओं के लिए एकजुट होने की अपील की।
वन दरोगा पदों पर मृतक आश्रितों की नियुक्ति रोकने के लिए संघर्ष करने पर जोर दिया गया। मांग की कि क्षेत्रीय प्रभाग में कार्यरत कर्मचारियों को वन क्षेत्र में गश्त तथा अवैध शिकार, पातन, खनन आदि अवैध कार्यों पर रोक के लिए अतिरिक्त भत्ता दिए जाना चाहिए। श्रमिकों के लंबित देयकों का भुगतान करने की मांग उठाई गई।
वन पंचायत के कार्यों के लिए अलग से प्रभाग बनाने,पर जोर दिया गया। अलग अलग रेंजों से आए वन बीट अधिकारियों ने फील्ड स्तर पर आ रही दिक्कतों के बारे में बताया। बैठक में नवनियुक्त वन आरक्षियों का स्वागत किया गया, उन्हें संगठन की सदस्यता दिलाई गई। अध्यक्षता जिलाध्यक्ष बलवंत भंडारी तथा संचालन वृत्त उपाध्यक्ष हरेंद्र सतवाल ने किया। यहां प्रभागीय संगठन महामंत्री खजान सिंह मेहता, रोशन कुमार, त्रिभुवन उपाध्याय, किशोर चंद्र, महेश अल्मिया, पूनम पंत, बबीता नेगी, कविता मेहता, तनूजा पाठक, हर्षिता पाण्डेय, दीपा बिष्ट, मंजू कबडौला, हिम्मत बोरा, गणेश चंद्र, गणेश पलड़िया, राजीव पांडेय आदि थे।