रानीखेत (अल्मोड़ा)। पंचायत चुनाव के बाद अब ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी के लिए सियासी घमासान तेज हो गया है। ताड़ीखेत ब्लॉक में चार दावेदार मैदान में डटे हैं और सभी अपने-अपने पाले में 21 क्षेत्र पंचायत सदस्यों का बहुमत होने का दावा कर रहे हैं। जमीनी हकीकत यह है कि अभी तक किसी भी प्रत्याशी के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है। ऐसे में जोड़-तोड़ की राजनीति ने जोर पकड़ लिया है।
सूत्रों की मानें तो फिलहाल कोई भी गुट 21 सदस्यों का आंकड़ा पक्का नहीं कर पाया है। इस कारण से अब स्थिति पूरी तरह से ओपन गेम बन गई है जिसमें कोई भी परिणाम सामने आ सकता है। भाजपा और कांग्रेस के अलावा निर्दलीय उम्मीदवार भी दमदार तरीके से मुकाबले में हैं और अगर समीकरण नहीं बने तो किसी निर्दलीय का पलड़ा भारी पड़ सकता है।
वहीं लोगों का कहना है कि जिनको उन्होंने भारी मतों से जीत दिलाई, वे अब तक क्षेत्र में दिखाई नहीं दे रहे। न ही वे जनता से संवाद कर रहे हैं। मतदाता खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं और अब देखना है कि यह नाराजगी आगे जाकर किस रूप में सामने आती है।
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सदस्यों को साधने की कवायद तेज
ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी हासिल करने के लिए चारों गुटों में जबरदस्त भागदौड़ मची है। सभी उम्मीदवार अपने-अपने स्तर पर क्षेत्र पंचायत सदस्यों को अपने पाले में लाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। कहीं बैठकों का दौर चल रहा है, तो कहीं होटल या रिसॉर्ट में सदस्यों को रोके जाने की चर्चाएं भी हैं। सूत्रों के अनुसार कुछ सदस्यों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा रहा है ताकि वे दूसरे गुटों के संपर्क में न आ सकें।
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अब निगाहें सियासी समीकरण पर टिकी
ताड़ीखेत में ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी के लिए तस्वीर अब भी धुंधली बनी हुई है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सियासी समीकरण किस ओर करवट लेते हैं। क्या किसी बड़े दल को कामयाबी मिलेगी, या फिर कोई निर्दलीय ही सियासी चौंकाने वाला कदम उठाएगा। फिलहाल सियासी सरगर्मी अपने चरम पर है और अगले कुछ दिनों में तस्वीर साफ होने की उम्मीद है। तब तक ताड़ीखेत में जारी राजनीतिक रस्साकशी चर्चा का केंद्र बनी हुई है।