जाड़े के सीजन में बारिश नहीं होने के कारण रबी की फसलों को 25 से 30 प्रतिशत नुकसान पहुंचा है। कृषि, उद्यान और राजस्व विभाग द्वारा किए गए सर्वेक्षण में इस बात का खुलासा हुआ है। मुख्य कृषि अधिकारी ने सर्वेक्षण रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी है। जिलाधिकारी के माध्यम से यह रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है।
इस बार जाड़े के सीजन में बारिश काफी कम हुई है। बारिश नहीं होने से गेहूं, जौ, सरसों, उड़द, मटर, आलू आदि समेत सब्जी और फलों की उपज को काफी नुकसान पहुंचा है। नुकसान का जायजा लेने के लिए शासन के निर्देश पर जिले में कृषि, उद्यान और राजस्व विभाग के कर्मचारियों की संयुक्त टीमों ने सभी तहसील क्षेत्रों में सर्वेक्षण किया था।
सर्वेक्षण के लिए कृषि विभाग से सहायक कृषि अधिकारी, उद्यान से सहायक विकास अधिकारी और राजस्व विभाग से उप राजस्व निरीक्षकों को लगाया गया था। मुख्य कृषि अधिकारी प्रियंका सिंह ने बताया कि सर्वेक्षण रिपोर्ट प्राप्त हो गई है और रिपोर्ट में सूखे के कारण रबी की फसलों को 25 से 30 प्रतिशत नुकसान होने का आकलन किया गया है।
उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दी गई है। बताया गया है कि जल्द ही जिलाधिकारी के माध्यम से इसे शासन को भेज दिया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि उसके बाद काश्तकारों को मुआवजा आदि देने के बारे में शासन स्तर से फैसला होगा।
फसलों की स्थिति का फिर सर्वेक्षण होगा
कृषि विभाग ने गत 24 जनवरी को हुई बारिश से पहले फसलों को सूखे हुई क्षति का सर्वेक्षण किया। मुख्य कृषि अधिकारी वीपी मौर्या ने बताया कि बारिश से पहले किए गए गेहूं, जौ और मसूर की फसल को सूखे से 15 प्रतिशत तक क्षति हुई है।
बताया कि अब शासन ने बरसात के बाद फसलों की स्थिति का फिर से सर्वेक्षण करने के उनको और राजस्व विभाग को निर्देश दिए हैं। मौर्या ने बताया कि बारिश से खासकर मसूर की फसल को लाभ हुआ है।
बारिश से सिंचित क्षेत्र में बढ़वार संतोषजनक रहने के लिए अभी कुछ और बारिश की जरूरत है। बता दें कि जिले में 11662 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है। जिसमें पांच हजार हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र है जबकि बांकी भूमि असिंचित है।