अल्मोड़ा। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में भी जिले में फूलों के उत्पादन से जुड़े किसानों का कारोबार पूरी तरह चौपट हो गया है। कोरोना काल में फूलों की बाजार में मांग न होने से फूल बिक्री के लिए नहीं भेज पा रहे हैं। किसानों के खेतों और पॉलीहाउसों में फूल मुरझा रहे हैं। इससे किसान परेशान हैं।
फूलों की खेती को कई किसान आय का साधन बना रहे हैं। जिले में किसान करीब 24 हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती करते हैं। जिले में विभिन्न स्थानों पर 70 से अधिक किसान व्यावसायिक रूप से फूलों की खेती करते हैं।
इनमें लीलियम, कारनेशन, ग्लाइडोलिया, लीली आदि फूलों का उत्पादन होता है। पिछले साल भी कोरोना संक्रमण के कारण किसानों का फूलों का कारोबार चौपट हो गया था।
किसानों को आशा थी कि वर्ष 2021 में कारोबार सुधर जाएगा, लेकिन इस वर्ष भी कोरोना की दूसरी लहर से फूलों के व्यापार पर ग्रहण लग गया है। बाजार से महंगा बीज लेकर किसान पाली हाउसों और खेतों में फूलों की खेती कर रहे हैं।
फूल खिलने के कोरोना कर्फ्यू में विपणन के लिए फूल नहीं भेज पा रहे हैं और खेतों में ही फूल खराब होने की स्थिति में आ गए हैं। इससे फूलों की खेती करने वाले किसानों के सम्मुख भी रोजी-रोटी का संकट हो गया है।
मुख्य उद्यान अधिकारी टीएन पांडे ने बताया कि जिले में सालाना करीब 35 लाख रुपये से अधिक का फूलों का कारोबार होता है। किसान दिल्ली मंडी फूल बिक्री के लिए भेजते हैं।
पॉलीहाउस में कारनेशन फूलों का उत्पादन करता हूं्। पिछले वर्ष और इस वर्ष कोरोना संक्रमण के कारण फूलों का व्यवसाय चौपट हो गया था। इससे पूर्व के वर्षों में सात से आठ लाख रुपये के फूलों की बिक्री हो जाती थी।
- कुबेर सिंह, ग्राम तोल्यो (सल्ट)।
बाजार से करीब सात लाख रुपये के लीली का बीज खरीदकर बोया था। लीली फूल तैयार होने के कगार पर हैं। पिछले साल भी फूलोें की खेती बरबाद हो गई थी। इस बार भी कोरोना संक्रमण के कारण फूलों की बिक्री होने की कोई उम्मीद नहीं है।
- राजन सिंह, ग्राम मल्ला गैराड़ (भैंसियाछाना)।