वहीं काशीपुर जा रही एक बोलेरो पहाड़ी से पत्थर गिरने से क्षतिग्रस्त हो गई। संयोग से उसमें सवार तीन लोगों की जान बच गई। गधेरे का मलबा मरचूला में वीरेंद्र सिंह के ढाबे में मलबा घुस गया और सारा सामान नष्ट हो गया।
सांकर में पूरन सिंह के ढाबे का सारा सामान बह गया। सांकर गांव में बालम सिंह समेत तीन अन्य लोगों के घरों के आंगन क्षतिग्रस्त हो गए हैं और मकान खतरे की जद में आ गए हैं। वहीं कृषि भूमि को भी काफी नुकसान पहुंचा है।
लोनिवि ने शनिवार सुबह पांच बजे मौके पर एक जेसीबी भेजी और सड़कों से मलबा हटाने के काम शुरू किया। बाद में एक अन्य जेसीबी भी सड़कों को खोलने का काम शुरू किया। शनिवार दोपहर करीब 12 बजे इन मार्गों पर यातायात सुचारु हो सका।
इन गांवों में हुई है क्षति
अतिवृष्टि से झड़गांव, मरचूला, सांकर, चिमटाखाल, हरड़ा आदि कई गांवों में पेयजल योजनाओं के पाइप बह गए हैं। इससे इन गांवों में पेयजल आपूर्ति ठप हो गई है। पैदल रास्तों को भी काफी नुकसान पहुंचा है। इस कारण गांवों में मूलभूत सुविधाओं की कमी हो गई है। इससे चिंतित ग्रामीणों ने प्रशासन से मूलभूत सुविधाएं बढ़ाने की मांग की है।
अतिवृष्टि की सूचना मिलने के बाद ही तहसीलदार और राजस्व उपनिरीक्षक को मौके पर भेजा गया है। क्षेत्र में बंद पड़ी सड़कों को खोल दिया गया है। क्षति का आकलन कराया जा रहा है। क्षति में क्षति के आकलन के बाद प्रभावितों को दैवी आपदा मद से मुआवजा दिलाया जाएगा।
- राजकुमार पांडे, उपजिलाधिकारी, सल्ट