जनसमस्याओं को लेकर पिछले तीन दिन से क्रमिक अनशन कर रहे रिस्कन घाटी संघर्ष समिति के पदाधिकारियों और ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ने लगा है। अनशन स्थल पर हुई सभा में ग्रामीणों ने कहा शासन-प्रशासन को जनसरोकारों से कोई लेना-देना नहीं है, तीन दिन से क्रमिक अनशन चल रहा है, लेकिन सुध नहीं ली जा रही है। बिजली, पानी और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत समस्याओं का शीघ्र निराकरण नहीं हुआ तो आंदोलन तेज किया जाएगा। समर्थन देने के लिए कई गांवों के लोग मौके पर पहुंचे।
रिस्कन घाटी से जुड़ी 22 ग्राम सभाओं की समस्याओं के निराकरण को लेकर ग्रामीण एकजुट हो गए हैं। सुनाड़ी में क्रमिक अनशन पर तीसरे दिन संघर्ष समिति के उपाध्यक्ष जीवन और पूर्व प्रधान दान सिंह बिष्ट बैठे। सभा में वक्ताओं ने कहा कि कांडे-सुरईखेत-द्वाराहाट-ईड़ा मोटर मार्ग में आज तक डामरीकरण नहीं हो सका है। जिसके चलते आए दिन दुर्घटनाएं हो जाती हैं। बयेला-नाड़-फल्द्वाड़ी मोटर मार्ग का निर्माण भी नहीं हुआ। खलना-सुंआली, बेढुली पेयजल योजनाओं का पुनर्गठन करने का आश्वासन भी हवाई साबित हुआ है। सिमलगांव में पशु चिकित्सक नहीं है, बिमांडेश्वर बैराज का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है। एकल अध्यापक वाले विद्यालयों में अध्यापकों की नियुक्ति करने सहित तमाम अन्य मांगें भी उठाई। आंदोलन को समर्थन देने के लिए रणां, कांडे आदि गांवों से भी लोग पहुंचे। इस अवसर पर जगदीश बुधानी, शांति देवी, सरस्वती देवी, मोहनी देवी, चंपा देवी, प्रेमा देवी, राधा देवी, कैलाश कांडपाल आदि ने विचार रखे। संघर्ष समिति के अध्यक्ष हरवंश बिष्ट ने ग्रामीणों से उग्र आंदोलन के लिए कमर कस लेने का आह्वान किया।