सालजाड़ा में हुए तिहरे हत्याकांड के आरोपियों का पता लगाने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। कई माह तक पुलिस को आरोपियों के बारे में कोई सुराग नहीं मिल पाया था। बाद में पुलिस को यह बात पता लगी कि आरोपियों ने घटना के दिन गांव के एक व्यक्ति से 500 रुपए में मुर्गा खरीदा था। इसका पैसा उन्होंने बाद में देने की बात कही थी। यही मुर्गा अपराधियों तक पहुंचने में मददगार साबित हुआ।
हत्यारोपी धरम बूड़ा 2014 में पहले भी सालजाड़ा निवासी प्रेम सिंह के यहां मजदूरी का काम कर चुका था और अप्रैल 2014 में वह नेपाल वापस चला गया। उसके बाद 25 जुलाई को नेपाल से वापस आने पर उसकी मुलाकात नैनीताल में अपने इलाके के कमल साही से हुई। धरम बूड़ा ने कमल साही से काम के लिए सालजाड़ा चलने को कहा और दोनों 26 जुलाई को प्रेम सिंह के घर पहुंच गए। दोनों नेपाली मजदूरों के कहने पर प्रेम सिंह ने उस दौरान काम कर रहे जम्मू कश्मीर के मजदूरों का करीब 13-14 हजार रुपए का हिसाब कर दिया। प्रेम सिंह के पास रुपए देखकर धरम बूड़ा और कमल साही के मन में लालच आ गया और उन्होंने प्रेम सिंह को लूटने की योजना बना ली। 27 जुलाई को प्रेम सिंह किसी काम से अल्मोड़ा आए थे। नेपालियों ने उन्हें फोन करके एक बोतल शराब ले आने को कहा और शाम को गांव के बहादुर राम के वहां से 500 रुपए में एक मुर्गा खरीद लाए। रात को दोनों ने शराब पी। उसके बाद जब सब लोग सो गए।
प्रेम सिंह का घर एकांत में है और वहां वह, उनकी पत्नी धनुली देवी के साथ उनका नाती अंकुर (13) ही रहते थे। दोनों ने कमरे में घुसकर लूट की नीयत से प्रेम सिंह की गला दबाकर हत्या कर दी। इस बीच प्रेम सिंह की पत्नी धनुली देवी ने अंकित (13) को अपने पास चिपका लिया। प्रेम सिंह की हत्या का राज खुलने के अंदेशे पर आरोपियों ने धनुली देवी और मासूम अंकित का भी गला घोंट दिया। फिर जेवरात और नगदी लूटकर रात में ही ध्याड़ी पहुंच गए और वहां से चंपावत होकर नेपाल भाग निकले। इस तिहरे हत्याकांड को लेकर हाल में कई बार धरना प्रदर्शन भी हुए। काफी दिनों तक पुलिस को हत्यारों के बारे में कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था। किसी तरह यह बात सामने आई कि प्रेम सिंह के घर पर रहने वाले एक नेपाली मजदूर ने गांव में बहादुर राम से मुर्गा खरीदा था। उसके बाद से वह फरार है। फिर पुलिस इसी सूत्र को आगे बढ़ाते हुए अपराधियों तक पहुंचने में सफल हुई।
पूर्व एसपी के तबादले की वजह बना था यह हत्याकांड
अल्मोड़ा। सालजाड़ा का तिहरा हत्याकांड पूर्व एसपी अशोक कुमार भट्ट के कार्यकाल में हुआ था। उनके समय में भी पुलिस की टीम लगातार आरोपियों का पता लगाने में जुटी थी लेकिन उनकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी। बाद में उनका एक साल से पहले ही यहां से स्थानांतरण हो गया था। बताया जाता है कि यह तिहरा हत्याकांड भी उनके जल्दी स्थानांतरण की वजह बना था।