अल्मोड़ा। कोरोना का संक्रमण फिर से बढ़ने लगा है। शनिवार को महिला अस्पताल में पहुंची एक गर्भवती समेत 29 लोगों की कोरोना रिपोर्ट पॉजीटिव निकली है। हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने गर्भवती को तत्काल बेस अस्पताल भेज दिया। अस्पताल परिसर में सतर्कता बढ़ा दी गई है।
जिले में कोरोना की संभावित तीसरी लहर का खतरा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में अगर लोग जागरूक नहीं हुए तो दिक्कतें बढ़ सकती हैं। कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए जिला पुलिस ने उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। सीओ राजन सिंह रौतेला ने शनिवार को नगर क्षेत्र में लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को जागरूक कर 25 लोगों के चालान भी काटे। एसएसपी ने भी सख्त आदेश दिए हैं कि लोगों को पहले जागरूक किया जाए। उसके बाद भी जो लापरवाही दिखाए तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करें।
बाजार में लोगों में दिखी लापरवाही
अल्मोड़ा। कोरोना की संभावित तीसरी लहर की आहट के बाद भी बाजार क्षेत्र में लोग लापरवाही दिखा रहे हैं। कई लोग मास्क पहनकर निकल रहे हैं तो सुरक्षित दूरी का पालन नहीं कर रहे हैं। कई लोग ऐसे हैं जो न तो मास्क पहन रहे हैं और न ही सुरक्षित दूरी का पालन कर रहे हैं। ऐसे में अगर कोई संक्रमित व्यक्ति इस भीड़ में पहुंच गया तो आने वाले दिनों में कोरोना का खतरा और बढ़ सकता है।
जिले में संक्रमितों का आंकड़ा पहुंचा 12062
अल्मोड़ा। जिले में अब कोरोना संक्रमितों की संख्या 12062 पहुंच गई है। शनिवार को 29 व्यक्ति कोरोना संक्रमित मिले हैं। इसमें 28 हवालबाग में और एक सल्ट में संक्रमित मिला। शनिवार तक जिले में कुल 12062 व्यक्ति संक्रमित हैं, जिनमें से कुल 11840 संक्रमित स्वस्थ हो गए हैं। जिले में अभी 52 सक्रिय मामले हैं। डीएम वंदना सिंह ने आम नागरिकों से अपील की है कि वह कोरोना के निर्देशों का पूर्णत: अनुपालन करें। अनावश्यक घर से बाहर न निकलें। विभिन्न समारोहों में निर्धारित संख्या में प्रतिभाग करने के साथ ही सुरक्षित दूरी बनाए रखें। समय-समय पर अपने हाथ धोएं। प्रत्येक व्यक्ति मास्क अवश्य पहनें। किसी भी प्रकार के लक्षण होने पर तुरंत अपनी कोरोना जांच कराएं। उन्होंने 15 से 17 वर्ष की आयु के सभी से जल्द टीका लगवाने की अपील भी की है।
जिला अस्पताल अल्मोड़ा में बिजली गुल
अल्मोड़ा। जिला अस्पताल शनिवार सुबह बिजली गुल होने से मरीजों और डॉक्टरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बिजली जाने से अस्पताल के अंदर अंधेरा हो गया। हालांकि अस्पताल प्रबंधन की ओर से इसके लिए इंतजाम किए गए, लेकिन काफी देर तक मरीजों और डॉक्टरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।