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वेंटिलेटर की सुविधा मिलती तो बच सकती थी जान

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अल्मोड़ा। प्रदेश सरकार दावा कर रही है कि जिला स्तर पर बनाए गए कोरोना अस्पतालों में वेंटिलेटर की सुविधा दे दी गई है लेकिन हालत यह है कि अल्मोड़ा के बेस अस्पताल (कोरोना अस्पताल) में वेंटिलेटर चालू नहीं हैं। कहने को दो माह पहले बेस अस्पताल में छह वेंटिलेटर युक्त आईसीयू वार्ड शुरू कर दिया गया लेकिन स्टाफ न होने के कारण वेंटिलेटर सुविधा चालू नहीं हुई है। अस्पताल में यदि वेंटिलेटर की सुविधा उपलब्ध होती तो बुधवार रात मृत 48 वर्षीय कोरोना पीड़ित की जान बच सकती थी। परिजनों ने वेंटिलेटर की सुविधा उपलब्ध न होने पर रोष जताया है।
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प्रदेश सरकार ने अल्मोड़ा के बेस अस्पताल को कोरोना अस्पताल घोषित किया है। सरकार ने जुलाई में बेस अस्पताल के लिए 25 वेंटिलेटर भेज दिए थे। इंजीनियरों की टीम ने 25 जुलाई को बेस अस्पताल पहुंचकर छह बेड वाले आईसीयू वार्ड में छह वेंटिलेटर फिट कर दिए थे। बाकायदा वेंटिलेटर की सुविधा शुरू करने पर रोगियों ने काफी राहत महसूस की थी। खास तौर पर यह कहा जा रहा था कि सांस लेने में तकलीफ होने पर कोरोना मरीजों को वेंटिलेटर में रखकर तत्काल राहत पहुंचाई जा सकेगी। इससे उनकी जान बच जाएगी लेकिन बुधवार रात जब हवालबाग निवासी 48 वर्षीय पूर्व सैनिक को गंभीर अवस्था में बेस अस्पताल लाया गया तो पता लगा कि वहां वेंटिलेटर चालू नहीं है। मरीज को सांस लेने में काफी तकलीफ हो रही थी और उनका ऑक्सीजन स्तर काफी नीचे आ गया था। वेंटिलेटर के अभाव में डॉक्टर उसे हल्द्वानी रेफर करने की तैयारी कर रहे थे कि तभी उसने दम तोड़ दिया। उसके परिजनों का कहना है कि यदि बेस अस्पताल में वेंटिलेटर की सुविधा मिलती तो पूर्व सैनिक की जान बच सकती थी।
कोट
जुलाई में चार वेंटिलेटर फिट कर दिए गए थे। ऑक्सीजन भी उपलब्ध है लेकिन स्टाफ उपलब्ध न होने के कारण वेंटिलेटर की सुविधा शुरू नहीं हो सकी है। इसके लिए 24 घंटे की तीन शिफ्ट में डॉक्टर, नर्स और तकनीशियन की जरूरत है। भविष्य में स्टाफ को ट्रेनिंग में भेजा जाएगा। इसके बाद ही वेंटिलेटर की सुविधा मिल सकेगी।
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- डॉ. एचसी गड़कोटी, पीएमएस बेस अस्पताल, अल्मोड़ा।
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