प्रदेश सरकार जहां नौनिहालों को बेहतर शिक्षा देने के दावे कर रही है। वहीं जमीनी हकीकत इससे उलट है। शिक्षा विभाग की लापरवाही की बानगी शुक्रवार को जिले के राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चमुआ में देखने को मिली। शुक्रवार को स्कूल में एक भी शिक्षक पहुंचा ही नहीं। बच्चे काफी देर विद्यालय परिसर के बरामदे में बैठे रहे।
अभिभावकों को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने ग्राम प्रधान पूजा कार्की और विद्यालय प्रबंधन समिति अध्यक्ष ललिता कार्की काे दी। जिसके बाद एसएमसी अध्यक्ष तुरंत विद्यालय पहुंची। उन्होंने देखा कि स्कूल के सभी कमरों में ताले लगे हुए हैं और बच्चे अपना बैग लेकर बाहर बैठे हुए हैं। उन्होंने बीईओ को पूरा वाकया बताया। करीब साढ़े 11 बजे एक शिक्षक यहां पहुंचे लेकिन उनके पास कमरों की चाबी ही नहीं थी। जिस कारण स्कूल के ताले नहीं खुल पाए। बाद में कल यहां पढ़ाने पहुंचे शिक्षक से चाबी के बारे में जानकारी प्राप्त की गई। शिक्षक ने चाबी रखे जाने के बारे में जानकारी दी। तब अभिभावक चाबी लेकर आए। करीब दो घंटे बाद स्कूल के ताले खुले।
26 बच्चों के लिए एक शिक्षक वह भी अवकाश पर
एमडीएम के लिए आंगनबाड़ी का सहारा
शिक्षा विभाग की लापरवाही के कारण शुक्रवार को चमुआ में मध्याह्न भोजन (एमडीएम) व्यवस्था भी प्रभावित रही। भोजन माता ने बताया कि भोजनालय की चाबी स्कूल के कमरे में कहीं बंद करके चले गए। जिस कारण भोजनालय से सामान निकालना मुश्किल हो गया। मजबूरी में पास में ही स्थित आंगनबाड़ी की मदद ली गई। तब जाकर बच्चों के लिए मिड डे मील बन सका लेकिन वह भी मानकों के अनुरूप नहीं था। आंगनबाड़ी से जो सामान मिला। उसी से काम चलाना पड़ा।
लापरवाह शिक्षकों और अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
चमुआ में स्कूल न खुलने से संबंधित शिकायत मिली है। संबंधित मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। इस मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा। उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
-अत्रेश सयाना, डीईओ प्रारंभिक शिक्षा
शिक्षक के एक दिन का रोका वेतन
धौलादेवी के प्राथमिक विद्यालय चमुआ में शिक्षक की लापरवाही को विभाग के अधिकारियों ने गंभीरता से लिया है। संबंधित शिक्षक को नोटिस भेजकर उनका एक दिन का वेतन रोक दिया है। दरअसल यहां तैनात शिक्षक प्रमोद कुमार 20 अगस्त से तीन दिन के अवकाश पर थे। जिन्हें शुक्रवार को तैनाती लेनी थी। लेकिन शिक्षक अधिकारियों को बिना जानकारी दिए विद्यालय से नदारद रहे। जिसका खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ा।