रानीखेत (अल्मोड़ा)। पर्यटन नगरी की बाईपास सड़क योजना धड़ाम होती नजर आ रही है। बताया जा रहा है कि इस सड़क के मिलान कार्य में सैन्य भूमि की एनओसी नहीं मिल पा रही है। जिस कारण तीन किमी सड़क बनने के बाद वर्षों से निर्माण कार्य रुका हुआ है। बाईपास सड़क की सुविधा नहीं होने से नगर की यातायात व्यवस्था बुरी तरह से चरमराई हुई है। बाजार में आए दिन लोग घंटों वाहनों के जाम में फंसने को मजबूर हैं।
नगर की यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के उद्देश्य से 1980 के दशक में यहां भी बाईपास सड़क परियोजना को मंजूरी मिली। रायस्टेट के पास से लगभग एक करोड़ रुपये की लागत से सड़क को खनियां गांव होते हुए जालली-मासी मोड़ पर मिलाने की योजना बनी। खनियां गांव, इंदिरा बस्ती, राजपुरा और किलकोट के लोगों के अलावा ऐरोली के ग्रामीणों को इससे लाभ मिलना है।
लगभग एक दशक बाद किलकोट तक तीन किमी मार्ग बना, हालांकि जितनी सड़क बनी है, उसमें भी कॉजवे, कल्वर्ट, निकास नालियों का अभाव है। कई स्थानों पर डामरीकरण का कार्य नहीं हो सका है। बरसात में यह सड़क बार-बार क्षतिग्रस्त हो जाती है। किलकोट के बाद डिग्री कालेज के पास मुख्य जालली बैंड स्थित मुख्य सड़क पर इसका मिलान होना है।
लेकिन पिछले एक दशक से इसका निर्माण कार्य रुका हुआ है। बताया गया है कि जिस सड़क पर इस निर्माणाधीन सड़क का मिलान होना है, वहां सेना की बी4 भूमि आड़े आ रही है। सेना की तरफ से अभी तक एनओसी नहीं मिल पाई है। बाईपास सड़क कब अस्तित्व में आएगी, यह फिलहाल निश्चित नहीं है।
लोनिवि प्रांतीय खंड के सहायक अभियंता एनएस रावत बताते हैं कि किलकोट के बाद डिग्री कॉलेज स्थित मुख्य सड़क पर मिलान के लिए सेना की बी4 और वन विभाग की भूमि आड़े आ रही है। इसका प्रस्ताव शासन स्तर पर लंबित है। अन्य विकल्पों पर भी विचार हो रहा है।