कपकोट के पिंडारी रूट पर द्वाली के समीप पिंडर नदी पर बनी स्थाई पुलिया।
कपकोट/बागेश्वर। मानसून काल में लगी रोक हटने के बाद ग्लेशियरों में चहलकदमी बढ़ने लगी है। बारिश के दौरान पिंडारी ग्लेशियर रूट पर क्षतिग्रस्त रास्तों की मरम्मत और पिंडर नदी में अस्थायी पुलिया बनने से आवाजाही भी पहले की अपेक्षा सुगम हो गई है। सुविधाओं में सुधार के बाद ग्लेशियरों में आने वाले रोमांच के शौकीनों की संख्या में इजाफा होने की संभावना है।
15 जून से 15 सितंबर के बीच मानसून को देखते हुए ग्लेशियरों की सैर पर रोक लगा दी जाती है। सितंबर के दूसरे पखवाड़े से ट्रैकरों की आवाजाही शुरू हो जाती है। इस साल अधिक बारिश के कारण पिंडारी ग्लेशियर रूट बदहाल हो गया था। किमी छह से सात के बीच जगह-जगह भूस्खलन हुआ था। किमी 11 में भूस्खलन से करीब 100 मीटर रास्ता ध्वस्त हो गया था। किमी 14,15,19,23 और 25 में गधेरा आने से पैदल रास्ता क्षतिग्रस्त हो गया था। द्वाली से जीरो प्वाॅइंटर तक चेक डैम, रास्ते और दीवारों को भी नुकसान हुआ था। द्वाली में पिंडर नदी पर अस्थायी पुलिया भी रोक हटने तक नहीं बनी थी। अमर उजाला ने 16 सितंबर के अंक में ग्लेशियर बुला रहे, रास्ते डरा रहे.... शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। खबर प्रकाशित होने के बाद लोनिवि ने रूट की मरम्मत का काम शुरू कराया।
ईई अमित पटेल ने बताया द्वाली में पिंडर नदी पर दोनों अस्थायी पुलिया बनकर तैयार हो गईं हैं। रास्तों के सुधारीकरण का काम भी पूरा कर लिया गया है।