राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के मौके पर यहां ब्लाक के विभिन्न ग्राम प्रधानों की बैठक हुई। वक्ताओं ने कहा कि राज्य निर्माण के 14 साल बाद भी पंचायती राज एक्ट नहीं बन सका है। जिसके चलते पंचायतों का विकास भी प्रभावित हो रहा है। प्रधानों ने कहा कि वर्तमान में पंचायतों के अधिकारों का हनन भी हो रहा है। बैठक में पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय बढ़ाने की भी मांग उठाई गई।
वक्ताओं ने कहा कि सरकारों में पंचायतों के सुदृढ़ीकरण की इच्छा नहीं है। अगर इच्छा होती तो हर गांव में पंचायत सचिव की नियुक्ति होती। पंचायत प्रतिनिधियों को उचित मानदेय दिया जाना चाहिए। कहा कि वेतन, भत्ते बढ़ाने के लिए जहां सांसद, विधायक सभी नियमों को ताक पर रखकर एकजुट हो जाते हैं, वहीं पंचायत प्रतिनिधियों का कोई सुधलेवा नहीं हैं।
नुमाइंदे पहाड़ की विषमताओं के कारण योजनाएं नहीं बना रहे हैं। जिस कारण पलायन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। सरकारें अच्छे दिन आने की बात कहती हैं लेकिन चीनी, केरोसिन, राशन आदि आम जनता का खाद्यान्न कोटा घटाया जा रहा है। पहाड़ की खेतीबाड़ी जानवरों ने चौपट कर दी है, ऐसे में सरकार को ग्रामीणों को उचित मुआवजा देना चाहिए।
बैठक में प्रधान हिम्मत सिंह, पूरन पांडे, महेश पंत, जोगा राम, जानकी देवी, पुष्पा तिवारी, राधा किरौला, विपिन पंत, धर्मा देवी, हेमा देवी, हंसी देवी, अनीता देवी आदि प्रधान मौजूद थे।