फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

संयुक्त किसान मोर्चा के समर्थन में मनाया काला दिवस

विज्ञापन
विज्ञापन
अल्मोड़ा। संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय आह्वान पर विभिन्न राजनैतिक दलों और जनवादी संगठनों के लोगों ने किसानों के समर्थन में काली पट्टी बांधी और काला दिवस मनाया। उन्होंने केंद्र सरकार से लागू किए गए तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग उठाई। उन्होंने केंद्र सरकार से किसानों का उत्पीड़न बंद करने की मांग की।
विज्ञापन

उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी कार्यकर्ताओं ने पार्टी कार्यालय में बांह पर काली पट्टी बांधकर और तख्तियां लेकर केंद्र सरकार की किसान विरोधी नीतियों की आलोचना की। केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी ने कहा कि केंद्र सरकार देश के अन्नदाताओं के दमन पर उतारू है। सरकार ने महामारी को अपने पूंजीवादी मित्रों के लिए अवसर में बदलते हुए तीन काले कृषि कानून लाकर देश को भारी संकट में डाल दिया है। केंद्र सरकार की नीति भारतीय लोकतंत्र के लिए घातक है। वहां केंद्रीय सचिव आनंदी वर्मा, हीरा देवी, गोपाल राम, सरिता मेहरा, हेमा पांडे, किरन आर्या, योगेश बिष्ट, नरेंद्र सिंह आदि थे।
आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं ने भी बांह पर काली पट्टी बांधी और घरों पर काले झंडे लगाकर किसान आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसानों की मांगों की अनदेखी कर ही है। जिससे किसानों को केंद्र सरकार के तानाशाही रवैये के खिलाफ काला दिवस मनाने को मजबूर होना पड़ा है। आम आदमी पार्टी किसानों की लड़ाई में उनके साथ है। संगठन मंत्री मनोज गुप्ता, पूर्व जिला मीडिया प्रभारी भुवन जोेशी, योगेंद्र अधिकारी, विजय चौधरी, संजय तिवारी, मोहन भट्ट, गोपाल, पंकज कुमार, आशीष कुमार ने प्रदर्शन में भाग लिया। आम आदमी पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष अमित जोशी ने केंद्र सरकार पर किसानों के खिलाफ कार्य करने का आरोप लगाया। कहा कि पार्टी किसानों के आंदोलन को समर्थन जारी रखेगी।
विज्ञापन

वामपंथी और जनवादी संगठनों ने भी किया केंद्र के खिलाफ प्रदर्शन
अल्मोड़ा। वामपंथी पार्टियां और जनवादी संगठनों ने संयुक्त किसान मोर्चा के अखिल भारतीय प्रतिवाद दिवस का समर्थन जताया। पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने घरों पर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को तत्काल किसानों से वार्ता करनी चाहिए और अविलंब तीनों काले कृषि कानूनों को वापस लेना चाहिए। मोदी सरकार का शासन किसानों, मजदूरों, नौजवान, छात्र, महिला, कर्मचारी, छोटे व्यवसायियों के विरोध में रहा है। उन्होंने तीनों कृषि कानून वापस लेने, चार श्रम संहिताओं को निरस्त करने, निजीकरण खत्म करने, सभी नागरिकों के लिए मुफ्त और सार्वभौमिक वैक्सीनेशन की व्यवस्था करने, पीएम केअर फंड से ऑक्सीजन प्लांट सहित तमाम मांगें उठाईं।
विरोध दिवस में जनवादी महिला समिति की मुन्नी प्रसाद, राधा नेगी, पूनम तिवारी, भावना तिवारी, किसान सभा के दिनेश तिवारी, अरुण जोशी, किसान भंडारी, जनवादी नौजवान सभा के यूसुफ तिवारी, सीटू के आरपी जोशी आदि ने भाग लिया। पीटीसी, भोजनमाता, आशा, ग्राम प्रहरी संगठनों ने भी आंदोलन को समर्थन जताया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें