अल्मोड़ा। वनाग्नि से केवल जंगल, जीव जंतुओं और पर्यावरण को ही खतरा ही नहीं है बल्कि वनाग्नि से निकला ब्लैक कार्बन कोरोना वायरस को आश्रय देने का काम भी कर सकता है। इससे वायरस को ज्यादा समय तक हवा में रहने के साथ ही एक से दूसरे स्थान जाने का भी मौका मिल रहा है। ये मनुष्यों के लिए बहुत ही खतरनाक साबित हो सकता है।
कोसी स्थित जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण संस्थान के वैज्ञानिक वनाग्नि की घटनाओं से होने वाले अधिकतम नुकसान को लेकर अध्ययन कर रहे हैं। यहां पर प्रदूषण मामलों के वैज्ञानिक डॉ. जेसी कुनियाल बताते हैं कि वनाग्नि से निकला ब्लैक कार्बन आपकी हमारी सोच से कहीं ज्यादा हमको नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखता है। हमारे शरीर के बाल का वृत्त 70 माइक्रोन होता है और ब्लैक कार्बन का आकार 0.5 माइक्रोन है। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि यह आकार में कितना छोटा होता है।
ब्लैक कार्बन हवा में काफी देर तक उड़ता है और एक स्थान से दूसरे स्थान तक आसानी से चला जाता है। कहा कि 0.5 माइक्रोन के आकार का कोरोना वायरस हवा में मुक्त होता है तो उसे ब्लैक कार्बन के ऊपर आश्रय मिल सकता है। इस वजह से यह वायरस और भी ज्यादा खतरनाक हो सकता है। क्योंकि इसे ज्यादा देर तक हवा में रहने का मौका मिल रहा होगा और साथ ही ब्लैक कार्बन के जरिये दूर तक जाने का अवसर भी मिल सकता है। बताया कि इस समय वनाग्नि की घटनाएं काफी हो रही हैं और पर्यावरण में ब्लैक कार्बन की मात्रा भी काफी बढ़ गई है। इसलिए कोशिश करें कि धुएं से जुड़ा वायु प्रदूषण न होने दें।