नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश के बाद अल्मोड़ा नगर में व्यापारी कागज के लिफाफे और कपड़े के थैलों में उपभोक्ताओं को सामान दे रहे हैं। इससे काफी हद तक ें पालिथीन की थैलियों पर अंकुश लग गया है। लोग भी घरों से कपड़े के थैले लेकर बाजार सामान खरीदने आ रहे हैं। लोगों का कहना है कि पालिथीन थैलियों पर अंकुश लगाने के लिए इसकी फैक्ट्रियों को ही बंद कर देना चाहिए।
पालिथीन की थैलियां जहां पर्यावरण के लिए नुकसानदायक हैं वहीं कई बार पालिथीन की थैलियों के नालियां में फंस जाने से नालियां चोक हो जाती हैं। एनजीटी के आदेश के बाद शहर के व्यापारी भी पालिथीन की थैलियों का उपयोग नहीं कर कागज की थैलियों में उपभोक्ताओं को सामान दे रहे हैं। उपभोक्ता भी व्यापारियों से कागज की थैलियों में सामान देने की मांग कर रहे हैं। लोग भी घरों से कपड़े के थैले कर सामान लेने बाजार आ रहे हैं। हालांकि कतिपय व्यापारी चोरी-छिपे अभी भी पालिथीन की थैलियों में सामान देकर एनजीटी के आदेशों को परवाह नहीं कर रहे हैं।
चौक बाजार में सब्जी के दुकानदार कैलाश चंद्र पांडे का कहना है कि पालिथीन पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है। वह ग्राहकों को कागज के लिफाफों अथवा कपड़े के थैलियों में सामान दे रहे हैं। वहीं रैमजे के समीप दुकान चलाने वाले गुरमीत सिंह कहते हैं कि पालिथीन की थैलियों पर अंकुश लगाया जाना जरूरी है। इससे पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी।
रानीधारा निवासी डा. सुबोध कुमार पंत बाजार सामग्री खरीदने के लिए कपड़े का थैला लेकर आते हैं। डा. पंत कहते हैं कि पालिथीन उत्पादित करने वाली फैक्ट्रियों को ही सरकार को बंद करना चाहिए। जब उत्पादन ही नहीं होगा तो पालिथीन की थैलियां बाजार में नहीं आ पाएंगी। एनटीडी निवासी सरताज हुसैन भी सालों से सामग्री खरीदने के लिए बाजार कपड़े का थैला लेकर आते हैं। वह कहते हैं कि पालिथीन पर्यावरण के लिए घातक है। सभी को कपड़े के थैलों का प्रयोग करना चाहिए।