फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फोरम ने जिला सहकारी बैंक के विरुद्ध की गई शिकायत निरस्त की

विज्ञापन
विज्ञापन
अल्मोड़ा। सक्षम जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने शिकायतकर्ता के खाते से 1.99 लाख रुपये निकालने के मामले में जिला सहकारी बैंक लमगड़ा के शाखा प्रबंधक और जिला सहकारी बैंक अल्मोड़ा के प्रबंधक खिलाफ की गई शिकायत को निरस्त कर दिया है।
विज्ञापन

लमगड़ा ब्लाक के धुरासंग्रोली निवासी प्रकाश चंद्र पांडे ने फोरम के समक्ष 30 जुलाई 2019 को वाद दायर कर कहा था कि 10 नवंबर 2017 को उनके डीसीबी लमगड़ा शाखा के ऋण खाते से 1.99 लाख रुपये निकाल लिए गए। यह धनराशि मय ब्याज और मानसिक क्षति के 20 हजार रुपये दिलाने के लिए उन्होंने आयोग में वाद दायर किया था। शिकायतकर्ता ने साक्ष्य के रूप में विपक्षी को लिखे पत्रों की प्रतियां, पत्र और बैंक स्टेटमेंट की प्रतियां प्रस्तुत की। शिकायतकर्ता का कहना था कि 10 नवंबर 2017 को उनके खाते से 1.99 लाख रुपये निकाले गए। उस चेक में न तो शिकायतकर्ता ने हस्ताक्षर किए हैं और न ही बैंक से मिली चेक बुक में उस चेक का क्रमांक है। 15 दिसंबर 2018 को शिकायकर्ता ने इसकी शिकायत बैंक के शाखा प्रबंधक से भी की थी। आरोप लगाया कि विपक्षी गणों ने शिकायतकर्ता के खाते से धनराशि निकालकर सेवा में कमी की है। विपक्षीगणों के अधिवक्ता ने आयोग का ध्यान पत्रावली पर उपलब्ध खाता खोलने के प्रपत्र और डेबिट वाउचर की ओर आकर्षित किया। बहस के दौरान शिकायतकर्ता ने चेक बुक से संबंधित कोई भी साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया। न ही किसी प्रथम सूचना रिपोर्ट और न ही भारतीय रिजर्व बैंक को की गई कोई शिकायत संबंधी दस्तावेज ही प्रस्तुत किया। आयोग के अध्यक्ष मलिक मजहर सुल्तान, सदस्य सुरेश चंद्र कांडपाल और विद्या बिष्ट ने दोनों पक्षों को सुना। आयोग में शिकायतकर्ता यह सिद्ध करने में असफल रहा कि उसके हस्ताक्षरों से 1.99 लाख रुपये की धनराशि आहरित नहीं की गई है। आयोग ने पाया कि पत्रावली पर उपलब्ध हस्ताक्षरों का मिलान करने से स्पष्ट होता है बैंक से जो धनराशि आहरित की गई है वह शिकायतकर्ता के हस्ताक्षरों से ही आहरित हुई है। शिकायतकर्ता ने सभी प्रपत्रों में अंग्रेजी में हस्ताक्षर किए गए हैं। जिससे यह माना जा सकता है कि शिकायतकर्ता शिक्षित व्यक्ति है। इसलिए यह तर्क कि बैंक ने उससे सादे कागज में हस्ताक्षर करवा लिए गए थे। माने जाने योग्य नहीं है। आयोग ने आदेश में कहा कि ऐसी स्थिति में शिकायतकर्ता की शिकायत निरस्त की जाती है। विपक्षीगणों की ओर से अधिवक्ता रोहित कार्की ने प्रभावी पैरवी की।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें