धौलछीना (अल्मोड़ा)। जहां एक ओर सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बातें कर रही है, वहीं जिन विभागों के पास किसानों की जिम्मेदारी है उनके भवनों की सुध लेने वाला कोई नहीं हैं। धौलछीना में उद्यान विभाग और पशुपालन केंद्र के भवन जर्जर हालत में हैं। कार्यालयों में बैठना खतरे से खाली नहीं हैं। लेकिन अब तक कार्यालयों की मरम्मत नहीं हो पाई है।
धौलछीना स्थित उद्यान विभाग के भवन की हालत ऐसी है कि यहां पर बैठना खतरे को दावत देने के बराबर है। कार्यालय की छत के सरिया तक दिखाई दे रहे हैं। जगह-जगह से प्लास्टर उखड़ कर गिर रहा है। बरसात के दिनों में छतों से पानी टपक रहा है। उद्यान केंद्र का पूरा भवन खस्ता हालत में है। फर्स गड्ढों से पटा हुआ है, खिड़कियां-दरवाजे सड़ चुके हैं। सीलन के चलते उद्यान केंद्र में रखी दवाइयां और बीज आदि खराब हो रहे हैं।
यही हाल पशुपालन केंद्र का भी है, यहां भी छत से पानी टपक रहा है। छत से प्लास्टर गिरने के कारण कर्मचारियों का बरसात के दिनों में अंदर बैठना दूभर हो गया है। कार्यालय की टपकती छत से विभाग के आवश्यक दस्तावेजों को भीगने से बचाने के लिए इधर-उधर शिफ्ट करना पड़ता है। कर्मचारियों के मुताबिक बारिश में हालात बुरे हो जाते हैं।
जीर्ण-क्षीर्ण छत के कभी भी धराशायी होने का खतरा बना हुआ है। कर्मचारियों को हमेशा हादसे का डर बना रहता है। दोनों ही कार्यालयों में धौलछीना के 10 किमी के आसपास के क्षेत्र से रोजाना कई लोग कार्य कराने पहुंचते हैं लेकिन भवनों की दशा देख यहां पर कुछ देर रुकने में भी लोग डरते हैं।