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Almora News: दम तोड़ रहा अल्मोड़ा का प्रसिद्ध ताम्र उद्योग

Sat, 28 Jun 2025 12:29 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
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अल्मोड़ा के टम्टा मौहल्ले में कारीगरों की ओर से बनाए सुंदर तांबे के बर्तन। संवाद
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अल्मोड़ा। नई पीढ़ी के युवाओं के ताम्र उद्योग में रुचि नहीं लेने और सरकार की ओर से प्रोत्साहन नहीं मिलने के कारण अल्मोड़ा का प्रसिद्ध ताम्र उद्योग धीरे-धीरे दम तोड़ रहा है। टम्टा मोहल्ले में पांच साल पूर्व तक 80 परिवार इस व्यवसाय से जुड़े थे। अब इनकी संख्या घटकर चार से पांच रह गई है। ये परिवार स्थानीय व्यापारियों से तांबा खरीदकर बर्तन बनाकर बाजार में बेच रहे हैं। जबकि पहले वह बाहरी राज्यों से तांबे खरीदकर लाते थे और बर्तन बनाकर बेचा करते थे। उनके बनाए बर्तन उत्तराखंड के साथ-साथ देश-विदेश में प्रसिद्ध थे। ऐसा ही रहा तो कहीं ताम्र उद्योग इतिहास न बन जाए।
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शुक्रवार को संवाद न्यूज एजेंसी के संवाददाता ने अल्मोड़ा के प्रसिद्ध ताम्र उद्योग का हाल जानने के लिए टम्टा मोहल्ले की पड़ताल की। यहां काम कर रहे कारीगरों ने बताया कि पहले यहां दिन रात प्रत्येक घर से हथौड़े की आवाज गूंजा करती थी। सरकार की ओर से प्रोत्साहन न मिलने और युवाओं के इस कार्य में रुचि नहीं दिखाने के कारण अब चार से पांच ही लोग इस कार्य को करते हैं। पहले वह रामनगर, मुरादाबाद, करनाल, जगतरी हरियाणा से तांबा लेकर आते थे और बर्तन बनाकर कुमाऊं के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ मैदानी क्षेत्रों में बेचा करते थे। उनका कहना है कि आधुनिक दौर में तांबे के बर्तनों को लोग भुलाते जा रहे हैं। ऐसा ही रहा तो ताम्र उद्योग अपनी पहचान खो देगा।
ऐसे लोग ट्रेनिंग दे रहे जो काम ही नहीं जानते
टम्टा मोहल्ले में काम करने वाले लोगों का कहना है कि सरकार ताम्र उद्योग को बढ़ावा देने के लिए समय- समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन करती है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में ऐसे लोगों को मास्टर ट्रेनर बनाकर भेजा जाता है जिसको हथौड़ा पकड़ना भी नहीं आता। संवाद
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2020 से अब तक नहीं मिला सर्टिफिकेट
टम्टा मोहल्ले में लंबे समय से काम कर रहे 60 वर्षीय नवीन कुमार टम्टा का कहना है कि उन्हें वर्ष 2020 में सरकार ने उत्कृष्ट कार्य करने के लिए राज्य स्तर का पुरस्कार दिया था। उस समय कोरोना काल चल रहा था। वह पुरस्कार लेने के लिए देहरादून नहीं जा पाए थे। उन्हें पुरस्कार के तहत आठ हजार रुपये तो मिल गए थे, लेकिन आज तक सर्टिफिकेट नहीं मिल पाया है। उन्होंने जिला प्रशासन और सरकार से सर्टिफिकेट दिलाने की अपील की है। संवाद
इनसेट कोट-
शिल्पियों के संख्या में काफी कमी आई है। मैदानी क्षेत्रों में कई स्थानों पर तांबे के बर्तन तैयार करने के लिए मशीनें लगी हैं। इस वजह से जिले के शिल्पियों ने काम छोड़ दिया है। ताम्र उद्योग को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। - नंदी बिष्ट, सहायक निदेशक हस्तशिल्प केंद्र अल्मोड़ा।
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