अल्मोड़ा। स्थानीय मृग विहार पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। मृग विहार का विस्तार कर चिड़ियाघर का रूप दिया गया। बाकायदा यहां कई वन्यजीव भी रखे गए। इसके बावजूद चिड़ियाघर में कोई खास विकास नहीं हो सका। चार साल बीत गए, लेकिन बजट नहीं मिला, इससे सारी योजनाएं खटाई में हैं।
चार साल पूर्व वर्ष 2016 में यहां एनटीडी स्थित मृग विहार को सेंटर जू अथॉरिटी (सीजेडए) से मिनी चिड़ियाघर की मान्यता मिली थी। उस समय मिनी चिड़ियाघर में देश के अन्य चिड़ियाघरों से विभिन्न प्रजातियों के जानवर लाने की योजना थी। यहां की जलवायु उच्च हिमालयी और मैदानी दोनों क्षेत्रों के जानवरों के अनुकूल है, इसी आधार पर कई जानवर लाए जाने थे, लेकिन अब चार साल बाद भी सभी योजनाएं लंबित हैं। चिड़ियाघर सिर्फ कागजी मान्यताओं में रह गया है। हालांकि मान्यता मिलने के बाद से यह मिनी चिड़ियाघर तो है लेकिन इसमें कोई विकास नहीं हो सके हैं। चार साल में सीजेडए से चिड़ियाघर के लिए एक रुपया भी बजट आवंटित नहीं हो सका है। सिविल सोयम के डीएफओ केएस रावत ने बताया कि इस बार मान्यता बढ़ा दी गई है। लेकिन मान्यता मिलने के बाद से कोई बजट नहीं मिला है। इसके लिए पूर्व में प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं।
अब सीजेडए से 2021 तक मिल गई है मान्यता
अल्मोड़ा। वर्ष 2016 में मान्यता मिलने के बाद अभी कुछ माह पूर्व भी सीजेडए की टीम ने चिड़ियाघर का निरीक्षण किया। इसके बाद चिड़ियाघर को 2021 तक के लिए फिर से मान्यता दे दी गई। इस बार सीजेडए की ओर से यदि बजट आवंटित हुआ तो इसमें कार्य हो सकेंगे, लेकिन इस बार भी यदि बजट नहीं मिला तो ये अब भी सिर्फ कागजों में मान्यता प्राप्त रह जाएगा।
सिर्फ भोजन में ही समाप्त हो रहा बजट
अल्मोड़ा। बजट के अभाव में चिड़ियाघर में विकास कार्य नहीं हो पा रहे हैं। लगभग 40 साल पहले इसके लिए एनटीडी की 40 हेक्टेयर जमीन ली गई थी। अब पर्यटकों के आकर्षण के लिए यहां 66 चीतल, 27 सांभर, नौ तेंदुए, एक-एक घुरड़, भालू, सफेद बंदर रखे गए हैं, कुछ अन्य जानवर भी हैं। सालभर मिलने वाला बजट सिर्फ जानवरों के भोजन और श्रमिकों की मजदूरी में ही समाप्त हो जाता है। चिड़ियाघर में प्रतिवर्ष करीब 35 लाख रुपये जानवरों के भोजन में लग रहे हैं। कभी कुछ बजट बचता है तो वहां रास्तों की मरम्मत और अन्य कार्य बमुश्किल हो पाते हैं।
कोरोना काल में पर्यटक न पहुंच पाने से हुआ नुकसान
अल्मोड़ा। मृग विहार एनटीडी में हर साल करीब 40 हजार पर्यटक पहुंचते हैं। विभाग प्रति व्यक्ति 20 रुपये और बच्चों का 10 रुपये शुल्क वसूलता है। इससे करीब सात से आठ लाख रुपये प्रतिवर्ष आय होती है, जो कि सरकार के खाते में जमा होती है, लेकिन इस बार कोरोना के चलते चिड़ियाघर की आय पर भी बुरा प्रभाव पड़ा। इस साल लॉकडाउन के बाद से 19 अगस्त को चिड़ियाघर खुला लेकिन पर्यटकों के यहां न पहुंच पाने से काफी नुकसान हुआ है। चिड़ियाघर में इस बार स्थानीय लोग ही पहुंच पाए। लगभग एक हजार लोगों ने टिकट लिया। इससे मृग विहार को मात्र 20 हजार रुपये की ही कमाई हो सकी है।