जिले के सोमेश्वर तहसील क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन की काफी संभावनाएं हैं, लेकिन अलग राज्य बनने के डेढ़ दशक बाद भी इस ओर किसी का ध्यान नहीं है।
इन स्थलों के विकास के लिए कोई काम नहीं हुआ है। क्षेत्र के ऐड़ाद्यो मंदिर, पिनाकेश्वर मंदिर और बदरीनाथ मंदिरों तक पहुंचने के लिए भी सुविधाएं नहीं हैं।
पर्यटन की दृष्टि से पूरा सोमेश्वर घाटी क्षेत्र उपेक्षित है। घाटी क्षेत्र में लहलहाते खेत पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। यहां पर्यटन की दृष्टि से ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर काफी प्रसिद्ध है।
सोमेश्वर से सात किमी पैदल दूरी पर एड़ाद्यो मंदिर है। मंदिर को जाने वाला पैदल मार्ग जीर्ण-शीर्ण स्थिति में है। यहां से हिमालय का शानदार दृश्य दिखाई देता है, पर्यटक बड़ी मशक्कत के बाद मंदिर पहुंचते हैं, लेकिन वहां कोई सुविधाएं नहीं हैं।
वहीं कौसानी मार्ग में सात किमी दूर वाहन से जाने के बाद तीन किमी पैदल दूरी पर पिनाकेश्वर मंदिर पहुंचा जाता है। यह मंदिर भी उपेक्षित है। इसके अलावा बिंता मार्ग में तीन किमी दूर बदरीनाथ मंदिर स्थित है।
इस मंदिर के लिए टीका चंदन और पूजन सामग्री बदरीनाथ धाम से ही आती है, लेकिन यह मंदिर आज भी पर्यटन मानचित्र में शामिल नहीं किया गया है।
न ही इन धार्मिक स्थलों के बारे कहीं बोर्ड लगे हैं। इससे पयर्टकों और लोगों को इन धार्मिक स्थलों के बारे में जानकारी नहीं मिल पाती है।
कोसी और साईं नदी के संगम दौलबगड़ में भैरव मंदिर के समीप झील निर्माण की योजना थी, ताकि झील बनने के बाद यह स्थल पर्यटक स्थल के रूप में विकसित हो सके।
पूर्व सासंद प्रदीप टम्टा द्वारा की गई घोषणा पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इसके अलावा सोमेश्वर में कोई पर्यटक आवास गृह भी नहीं है। जिससे कि पर्यटक यहां ठहरकर धार्मिक पर्यटन से लाभान्वित हो सकें।