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न्याय के देवता हैं चमड़खान के ग्वेल

Sun, 15 Jul 2012 12:00 PM IST
Almora
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चमड़खान। रानीखेत नगर से करीब 25 किमी दूर चमड़खान में ग्वेल देवता न्याय के देव के रूप में पूजे जाते हैं। क्षेत्र के लोगों के अपार श्रद्धा के केंद्र इस मंदिर में चैत्र और आश्विन माह के नवरात्र और बैसाख को मेला लगता है। साल भर भी मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। मनौती पूरी होने पर भक्त चुनरी, बताशे और फल आदि अर्पित करते हैं।
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चमड़खान कस्बे के चीड़ वृक्षों के झुरमुटों के बीच ग्वेल राजा का मंदिर है। मंदिर के बारे में मान्यता है कि पूर्व में जब ग्वेल देवता चंपावत से भ्रमण पर निकले तो उन्होंने चितई, ताड़ीखेत तथा चमड़खान में अपने दरबार लगाए। इन स्थानों पर उन्होंने लोगों को न्याय दिया और उनके कष्टों का निवारण किया। तब से यह सभी स्थल आस्था के केंद्र बन गए। यहां मंदिर पहले काफी छोटा था जो अब श्रद्धालुओं के सहयोग से भव्य बन गया है। थौली गांव के श्रद्धालु हरि दत्त जोशी ने मंदिर में ग्वेल देवता की मूर्ति की प्रतिष्ठा की है। मंदिर परिसर में कलुवा देव, नरसिंह देवता, दुर्गा, गड़देवी माता तथा बजरंग बली के मंदिर भी स्थापित हैं। मंदिर में दूर दराज से श्रद्धालु पूजा-अर्चना को आते हैं। चैत्र तथा आश्विन की नवरात्र में मंदिर मेला लगता है। मेले में राज्य के अलावा, यूपी, दिल्ली और हरियाणा से बड़ी संख्या में विभिन्न उत्पादों के व्यवसायी पहुंचते हैं। लोगों का कहना है कि मंदिर के आसपास से जो भी बारात निकलती है दूल्हा और दुल्हन ग्वेल राजा का सम्मान कर डोली, घोड़ी से उतरकर पैदल चलते हैं। इस मंदिर के बाद श्रद्धालु बिनसर महादेव, तिलोकेश्वर महादेव तथा पीपलकोट में सिद्धेश्वर महादेव मंदिरों के पूजन के लिए जरूर जाते हैं। ग्राम प्रधान शीला खाती ने बताया कि मंदिर क्षेत्र का धार्मिक पर्यटन के रूप में विकास होने पर यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में खासी वृद्धि होगी। इससे रोजगार के अवसर भी बढेंगे।
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