अल्मोड़ा। कोरोना महामारी के खतरे से निपटने के लिए स्कूली बच्चे भी अब तैयार हैं। कोरोना को हराने के लिए जिले के 556 स्कूलों में 12 से 14 साल के बच्चों को सुरक्षा कवच दिया जा रहा है जिसमें 457 सरकारी और 99 निजी स्कूल शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग ने जिले में कुल 20 हजार बच्चों को टीके का सुरक्षा कवच देने का लक्ष्य रखा है जिसमें से स्वास्थ्य विभाग छह हजार बच्चों का टीकाकरण करा चुका है।
12 से 14 साल के बच्चों को कोरोना का टीका लगाने के लिए स्कूलों में व्यवस्था बनाई गई है। करीब एक सप्ताह पूर्व बच्चों के टीकाकरण अभियान का शुभारंभ हुआ था। जिले में 99 निजी, 161 जूनियर हाईस्कूल, 97 हाईस्कूल, 166 इंटर कॉलेज और 33 अशासकीय विद्यालयों में टीकाकरण किया जा रहा है। जिले में कुल 20 हजार बच्चों को टीका लगाने का स्वास्थ्य विभाग ने लक्ष्य रखा है जिसमें से अब तक छह हजार बच्चों को स्वास्थ्य विभाग टीका लगा चुका है। शनिवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम महर्षि स्कूल में टीकाकरण का जायजा लेने पहुंची।
टीका लगाने से उत्साहित हैं बच्चे
कोरोना का टीका मेरे दोस्त ने लगवाया था। उसने कहा की पता ही नहीं चलता कब लग जाता है। हल्का सा दर्द होता है फिर कोई परेशानी नहीं होती। फिर मैने भी टीका लगाया। अब मन में कोरोना का डर नहीं है।
- हर्षिता बजेठा, छात्र
कोरोना से बचाव के लिए टीका बेहद जरूरी है यह पता था लेकिन टीका लगाने में घबराहट हो रही थी। जब स्कूल के और बच्चों को टीका लगाते देखा तो घबराहट दूर हो गई। फिर मैने और बच्चों को भी टीका लगाने को कहा।
- नेहा पाण्डे, छात्रा
घर के सभी बड़े लोगों ने कोरोना का टीका लगा लिया था। जब मेरा नंबर आया तो सभी ने मुझ़े बताया कि टीका कितना जरूरी है। अखबार में भी मैंने टीकाकरण के बारे में पढ़ा था। इसी से प्रेरित होकर टीका लगा लिया।
- मानसी राठौर, छात्रा
टीका लगाने में बिल्कुल भी डर नहीं लगा। जब टीका लगा लिया तो हिम्मत आई कि मैं कोरोना से सुरक्षित हूूं। जब दूसरा टीका लगेगा तो उसे भी में लगाऊंगा और अपने दोस्तों को भी टीका लगाने के लिए कहूंगा।
- यश मेेहरा, छात्र
टॉफी, बिस्किट देकर कर रहे बच्चों को प्रोत्साहित
शिक्षक बच्चों का मनोबल बढ़ाने के साथ ही उन्हें करोना से बचाव के लिए टीकाकरण का महत्व बता रहे हैं। टीका लगने के बाद बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए स्कूल की तरफ से उन्हें टॉफी और बिस्किट दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग का भी पूरा सहयोग स्कूल को मिल रहा है।
- हेमा कांडपाल प्रधानाचार्य, महर्षि स्कूल
12 से 14 साल के बच्चों का टीकाकरण करने के लिए स्कूल की तरफ से तीन कमरे तथा बैठने की व्यवस्था स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों के लिए की गई है। बच्चों के अभिभावकों को भी कहा जा रहा है कि वह अपने बच्चे को टीकारण के लिए प्रेरित करें। जिन बच्चों को भय लग रहा है उन्हें प्रेरित कर उनके मन से डर निकाल रहे हैं। हर बच्चे को टीका लगाना स्कूल ने अपनी पहली प्राथमिकता में रखा है।
- सुंदर सिंह सिंह नयाल, अध्यापक
दोनों डोज लेने वाले 15 से 17 साल के बच्चे भी हैं खुश
मुझे और मेरी बहन को मम्मी- पापा ने दोनों टीके लगाए हैं। परिवार के सभी बड़े पहले टीका लगा चुके थे फिर हमने लगाया। टीका लगाने से पहले कोरोना का डर सता रहा था। पहला टीका लगाने के बाद डर कुछ कम हुआ। फिर दूसरा टीका लगाने के बाद खुद को पूरी तरह से सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
- आयुषी लोहनी
मैंने और मेरी बहन ने एक साथ कोरोना का पहला और दूसरा टीका लगाया। लेकिन टीका लगाने के बाद भी हम कोरोना नियमों का पूरी तरह से पालन करते हैं। अगर किसी को टीके से डर लगता है तो उसे टीके से नहीं कोरोना से डरना चाहिए। और यही डर उन्हें कोरोना को हराने की हिम्मतत देगा। आज हमारे पूरे परिवार ने टीका लगा लिया है।
- अदिका लोहनी-----------------
हमारे परिवार ने पहना सुरक्षा कवच, आप भी जरूर लगाएं टीका
बागेश्वर। कोरोना महामारी से सुरक्षा के लिए चलाए जा रहे टीकाकरण अभियान के तहत जिले में 12 से 14 आयु वर्ग के बच्चों को टीके लगाने का काम जोरशोर से चल रहा है। इसके तहत जिले में 5185 का टीकाकरण कराया जा चुका है। कई परिवारों में बच्चों का टीकाकरण होने के बाद सभी सदस्य को टीके लग चुके हैं। गरुड़ के मटेना निवासी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नंदी जोशी का परिवार भी संपूर्ण टीकाकरण करवा चुका है। परिवार के सदस्य अब लोगों को कोविड रोधी टीका लगाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
नंदी ने बताया कि कोविड रोधी टीकाकरण की शुरुआत के बाद से ही वह लोगों को टीकाकरण के लिए जागरूक करती आ रही है। आसपास वालों को प्रेरित करने के लिए उन्होंने सबसे पहले अपने परिवार के सदस्यों को टीका लगवाया। नंदी कोविड टीके की पहली और दूसरी डोज के बाद प्रीकॉशन डोज भी लगा चुकी हैं। केंद्रीय जल आयोग में तैनात उनके पति प्रकाश चंद्र जोशी भी कोविड रोधी टीके की दोनों डोज लगा चुके हैं। प्रकाश और नंदी के बड़े पुत्र गौरव (15) ने भी किशोरों का टीकाकरण शुरू होते ही टीका लगवाया था। वह टीके की दूसरी डोज भी ले चुके हैं। छोटे पुत्र सौरभ (12) ने भी पहली डोज लगा ली है। नंदी का कहना है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता होने के नाते उनकी जिम्मेदारी है कि वह लोगों को जागरूक करने से पहले खुद प्रेरणा बने। अपने परिवार का टीकाकरण कराने के बाद वे अपने क्षेत्र के लोगों को टीकाकरण कराकर कोरोना महामारी से बचाव का सुरक्षा कवच धारण करने के लिए जागरूक कर रही हैं। जिसमें उनके पति और दोनों पुत्र भी मदद कर रहे हैं।
59 प्रतिशत बच्चों का हुआ टीकाकरण
बागेश्वर। जिले में 12 से 14 आयु वर्ग में 8734 बच्चों के टीकाकरण का लक्ष्य है। जिसके सापेक्ष 59 प्रतिशत बच्चों का टीकाकरण कराया जा चुका है। नोडल अधिकारी टीकाकरण के अनुसार निजी स्कूलों में 1500 से अधिक और सरकारी विद्यालयों में करीब सात 7000 बच्चों को टीके लगाए जाने हैं। जिसके सापेक्ष निजी स्कूलों में करीब 80 प्रतिशत बच्चों को टीके की पहली डोज लगाई जा चुकी है। जबकि सरकारी स्कूलों में 56 प्रतिशत से अधिक बच्चों ने पहली डोज लगा ली है।