अल्मोड़ा। कस्बे में आवारा कुत्तों और बंदरों की संख्या पर लगाम नहीं लग पा रहा है। आए दिन लोगों को बंदर और आवारा कुत्तों के काटने के कारण अस्पताल का रुख करना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर अस्पतालों में इनसे बचाव के लिए लगने वाले रेबीज के इंजेक्शन ही उपलब्ध नहीं हैं। परेशान मरीजों को मजबूरन बाजार से महंगे दामों में इंजेक्शन खरीदने पड़ रहे हैं।
जिला और बेस अस्पताल में लोगों को बंदर, कुत्ते आदि द्वारा काटे जाने के पांच से छह मामले हर रोज आ रहे हैं। नगर के अलावा दूर-दराज के पीड़ित ग्रामीण भी इस उम्मीद में अस्पताल पहुंच रहे हैं कि अस्पताल से उन्हें रेबीज का इंजेक्शन उपलब्ध हो सकेगा, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है।
उन्हें बाजार से करीब 350 से 400 रुपये खर्च कर रेबीज के इंजेक्शन खरीदने पड़ रहे हैं। जिला अस्पताल में बंदर और कुत्ते के काटने के दो से तीन मरीज हर रोज पहुंच रहे हैं, लेकिन यहां भी लंबे समय से रेबीज के इंजेक्शन उपलब्ध नहीं हैं। फार्मेसिस्ट एमसी रेखाड़ी ने बताया कि बीते आठ नवंबर से अस्पताल में रेबीज के इंजेक्शन नहीं हैं।
इधर, जिला अस्पताल के पीएमएस प्रकाश वर्मा ने बताया कि रेबीज के इंजेक्शन की समस्या प्रदेश भर में काफी समय से हो रही है। दो माह पहले करीब तीन महीने के लिए रेबीज के इंजेक्शन की व्यवस्था की थी, लेकिन बाहर के लोगों के आने के कारण इंजेक्शन डेढ़ माह में ही खत्म हो गए। निदेशालय से इंजेक्शन की मांग की जा रही है।