चौखुटिया (अल्मोड़ा)। डॉक्टरों की घोर लापरवाही के चलते स्वाइन फ्लू की चपेट में आकर असमय मौत का शिकार हुए गैरसैंण नवोदय विद्यालय के युवा शिक्षक की मौत के एक हफ्ते बाद भी स्वास्थ्य महकमे की नींद नहीं खुली है।
एक ओर चमोली के डॉक्टरों की टीम ने गैरसैंण पहुंचकर तमाम लोगों के खून की जांच की, वहीं अपने जिले के अधिकारियों ने मृतक शिक्षक के घर भिकियासैंण जाकर उनके परिजनों के खून आदि के नमूने लेने की जरूरत महसूस नहीं की।
राजीव गांधी नवोदय विद्यालय गैरसैंण के युवा शिक्षक रोशन नैनवाल की स्वाइन फ्लू से हुई मौत के बाद उनके परिजन गहरे सदमे में हैं। रोशन को छह अप्रैल को तेज बुखार आने के बाद नौ अप्रैल को नागरिक चिकित्सालय रानीखेत में भर्ती कराया गया था।
परिजनों का आरोप है कि वहां मौजूद डॉक्टरों ने रोशन को मामूली मरीज की तरह भर्ती कर लिया गया, लेकिन ध्यान नहीं दिया गया, हालात खराब होने पर उसे पहले हल्द्वानी रेफर किया गया वहां से उसे राममूर्ति बरेली ले जाया गया, जहां 13 अप्रैल को उसकी मौत हो गई।
इधर रोशन की मौत स्वाइन फ्लू से होने की खबर मिलते ही हरकत में आए चमोली के डॉक्टरों की टीम गैरसैंण पहुंची और लोगों के खून आदि की जांच भी कर ली, लेकिन अपने जिले के स्वास्थ्य विभाग ने इस बारे में कोई जहमत नहीं उठाई।
रोशन के माता पिता व छोटा भाई भिकियासैंण में ही रहते हैं, यह सभी लोग रोशन की तीमारदारी में लगे हुए थे। रोशन का अंतिम संस्कार भी यहीं किया गया, लेकिन स्वास्थ्य महकमा उनके घर जांच के लिए नहीं पहुंचा।
पहले थराली के विधायक मगन लाल और अब शिक्षक रोशन की स्वाइन फ्लू से हुई मौत के बावजूद स्वास्थ्य महकमे की बेरुखी न जाने कितनों को असमय मौत की नींद सुलाएगी। मालूम हो कि रोशन गैरसैंण के वरिष्ठ पत्रकार पुरूषोतम असनोड़ा के भांजे हैं।
असनोड़ा ने भांजे की मौत के बाद परिजनों के खून के नमूने नहीं लेने के साथ ही इस मामले में रानीखेत नागरिक चिकित्सालय के संबंधित चिकित्सक के खिलाफ भी जांच की मांग की है। जिसने रोशन को भर्ती करने के बाद इलाज में अनदेखी की और बारह घंटे बर्बाद किए। यह मामला सोशल मीडिया पर भी छाया हुआ है, लोगों ने स्वास्थ्य महकमे को कटघरे में खड़ा किया है।