फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

‘व्यक्ति की सोचने की शक्ति को क्षीण कर देता है नशा’

विज्ञापन
विज्ञापन
अल्मोड़ा। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय हल्द्वानी और राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा संस्थान नई दिल्ली के सहयोग से नशे और शराब का परिवार, समाज और विद्यालयों पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव विषय पर एसएसजे परिसर अल्मोड़ा में आयोजित कार्यशाला में वक्ताओं ने कहा कि नशे के सेवन से शरीर के साथ मस्तिष्क पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है और व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति क्षीण हो जाती है।
विज्ञापन


डॉ. कौशल ने कहा शराब और नशे के सेवन से हमारे शरीर के साथ-साथ मस्तिष्क पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है। नशा व्यक्ति को चेतना शून्य बना देता है। मुख्य वक्ता डॉ. ममता ने कहा कि शराब के कारण व्यक्ति ही नहीं बल्कि पूरा परिवार नष्ट हो जाता है।

लोग उत्सव और समारोहों में शराब के प्रचलन को बढ़ावा दे रहे हैं जो कि समाज के लिए नुकसानदायक है। डॉ. सिद्धार्थ पोखरियाल ने कहा कि वर्तमान में शराब के कारण पहाड़ों में अपराध बढ़ रहे हैं। जिसका कारण जनचेतना की कमी और शिक्षा का अभाव है। डॉ. साकल्षी तिवारी ने बताया कि शिक्षा के माध्यम से ही नशे और शराब से संबंधित बुराइयों को दूर किया जा सकता है।
विज्ञापन


इससे पहले कार्यशाला का उद्घाटन राष्ट्रीय सेवा योजना प्रभारी डॉ. ममता और डॉ. सिद्धार्थ पोखरियाल द्वारा किया गया। तरुण नेगी ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों को धन्यवाद दिया। इस अवसर पर छात्रों ने शराबबंदी पर एक नाटक प्रस्तुत किया। प्रतिभागी छात्रा पूजा नेगी ने कार्यशाला को उपयोगी बताते हुए नशे से दूर रहने की अपील की। कार्यशाला में स्थानीय विद्यालयों में अध्ययनरत कई छात्र-छात्राएं मौजूद थीं।
विज्ञापन


विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें