बजट पर सरकारी कर्मचारियों की प्रतिक्रिया
आयकर सीमा नहीं बढ़ाने से कर्मचारियों में निराशा
अल्मोड़ा। केंद्र सरकार द्वारा आयकर की सीमा नहीं बढ़ाए जाने से सरकारी कर्मचारियों में निराशा है। कर्मचारियों का कहना है कि केंद्र सरकार को बजट में आयकर की सीमा बढ़ानी चाहिए थी।
राजकीय शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष हीरा सिंह बोरा ने कहा कि कर्मचारी आस लगाए थे कि सातवें वेतन आयोग के अनुसार आयकर की सीमा बढ़ेगी। बजट में कोई बदलाव नहीं किया है, जिससे सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों में निराशा है।
शिक्षक हरेंद्र सिंह बिष्ट का कहना है कि बजट में सरकार की दीर्घकालिक योजनाओं की झलक दिखती है। सरकारी कर्मचारियों के लिए आयकर सीमा सातवें वेतन आयोग के लागू होने के बाद बढ़ाई जानी आवश्यक है। कारपोरेट टैक्स बढ़ाए जाने से बजट जुटाने में सहायता मिलेगी। इसके लिए आम आदमी पर बोझ न डालकर सरकार ने अच्छा प्रयास किया है।
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फोटो-
1- हीरा सिंह बोरा। (फाइल नं. 01एएलएम03पी2- हरेंद्र सिंह बिष्ट। (फाइल नं. 01एएलएम04पी
आम बजट से युवा निराश
चौखुटिया(अल्मोड़ा)। बजट में युवाओं के लिए कुछ खास न होने से युवाओं में खासी मायूसी है। युवा वर्ग का कहना है कि एक ओर भारत को युवाओं का देश होने की बात कही जाती है वहीं युवाओं के भविष्य के बारे में कुछ नहीं सोचा जा रहा है।
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इन्सेट
युवाओं की तरफ ध्यान नहीं दिया गया
चौखुटिया(अल्मोड़ा)। युवा इंदर सिंह अटवाल का कहना है कि आजादी के बाद के कई बसंत गुजर गए परंतु युवाओं के भविष्य में सदैव पतझड़ का ही मौसम रहा है। रोजगार बढ़ाने की बात तो होती है, लेकिन बेरोजगारों की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। बजट से मायूसी हुई है।
फोटो- इंदर सिंह अटवाल(फोटो 01 एएलएमसीएचके06पी)
इन्सेट
युवाओं के बारे में आखिर कब सोचेंगे
चौखुटिया(अल्मोड़ा)। युवा तरुण रौताण का कहना है कि यदि देश की सरकारों ने युवाओं के बारे में कुछ सोचा होता तो यह स्थिति नहीं होती। बजट से भारी निराशा हुई है। समझ नहीं आता की देश के युवाओं के भविष्य के बारे में कब सोचा जाएगा।
फोटो- तरूण रौताण।(फोटो 01 एएलएमसीएचके07पी)
बजट..व्यापारियों की प्रतिक्रिया
अल्मोड़ा। मोदी सरकार के अंतिम बजट को लेकर व्यापारियों ने मिली जुली प्रतिक्रिया जताई है। आय कर सीमा में खास बढ़ोतरी नहीं की गई जिससे खास राहत नहीं मिल पाएगी।
इंसेट-
जीएसटी दरों को कम करना चाहिए था
अल्मोड़ा। मोदी सरकार के बजट में खाने पीने की वस्तुओं में जीएसटी की दरों को कम किया जाना चाहिए था। आय कर में छूट सीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जबकि व्यापारी राहत की उम्मीद कर रहे थे।
01एएलएम05पी- संजय अग्रवाल।
इन्सेट-
उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा बजट
अल्मोड़ा। केंद्र का आम बजट ठीक ठाक है। कई वस्तुओं में टैक्स में छूट होने से दाम कम होने की उम्मीद है। तंबाकू, गुटखा आदि उत्पादों के दामों बढ़ाना सही कदम है। फिर भी उम्मीद के मुताबिक व्यापारी हितों के लिए खास निर्णय नहीं लिए जा सके।
01एएलएम06पी- व्यापारी प्रदीप बिष्ट।
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सेवानिवृत्त ले. जनरल भंडारी ने रक्षा बजट को बताया निराशाजनक
रानीखेत (अल्मोड़ा)। रक्षा विशेषज्ञ पूर्व ले. जनरल मोहन चंद्र भंडारी ने रक्षा बजट को निराशाजनक बताया है। उन्होंने कहा कि फौज के आधुनिकीकरण के लिए कुछ भी प्रावधान नहीं किए गए हैं। 2.95 लाख करोड़ रुपये का रक्षा बजट रखा गया है जो कि ऊंट के मुंह में जीरा है। भंडारी ने आश्चर्य जताया कि पिछले साल 2.46 लाख करोड़ रुपये का बजट रखा गया था। दो सालों के अंतराल में भी सिर्फ कुछ लाख की बढ़ोतरी हुई है जो कि बहुत कम है। नार्थ ईस्ट, डोकलाम और जम्मू-कश्मीर की समस्याओं की तरफ बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया गया है। यह बजट तो सिर्फ तनख्वाह आदि अन्य मदों में ही खर्च हो जाता है। रक्षा विशेषज्ञ होने के नाते हमारी मांग थी कि रक्षा बजट जीडीपी का पांच प्रतिशत होना चाहिए, लेकिन सरकार ने पूरी तरह से निराश किया है।
फोटो: 01 आरकेटी 04पी: ले. जनरल मोहन चंद्र भंडारी।
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बजट को लेकर लोगों में मिली जुली प्रतिक्रया
रानीखेत (अल्मोड़ा)। आम बजट को लेकर लोगों ने मिली जुली प्रतिक्रिया व्यक्त की है। किसानों ने जहां इस बजट को हितकारी बताया है, वहीं दिव्यांग लोगों का कहना है कि बजट से अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका है। वृद्धजनों का कहना है कि जमा ब्याज कर में छूट दी गई है, लेकिन असहाय वृद्धजनों के लिए भी सरकार को बजट में कुछ प्रावधान करने चाहिए थे।
- आम बजट किसानों के लिए काफी हितकारी साबित होगा। प्रधानमंत्री सिंचाई योजना से हर खेत में पहुंचाने के लिए 26 सौ करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। किसानों को खेती के लिए लोन लेने की प्रक्रिया भी आसान की गई है।
राजेंद्र सिंह बिष्ट, काश्तकार मकणों।
-किसानों के लिए बजट में कई प्रावधान किए गए हैं, लेकिन किसानों की ऋण माफी की तरफ भी सरकार को ध्यान देना चाहिए था। खेती के लिए 11 लाख करोड़ रुपये का लोन भी ठीक निर्णय है। कृषि का समर्थन मूल्य और बढ़ाए जाने की जरूरत थी।
जगदीश चंद्र पपने, काश्तकार, तिमिलाडिग्गी।
-वरिष्ठ नागरिकों को विभिन्न जमाओं पर 50 हजार रुपये तक के ब्याज पर कर छूट देने का निर्णय स्वागत योग्य कदम है, लेकिन बजट में दूर दराज के असहाय वृद्धजनों के उत्थान के लिए कोई भी प्राविधान नहीं किए गए हैं। कई असहाय बुजुर्ग आज भी दयनीय हालत में गुजर कर रहे हैं।
एचजेबी सिंह, महासचिव हिमालयन वृद्धजन उत्थान समिति।
-गांवों में गरीबी में गुजर कर रहे बुजुर्गों के लिए बजट में खास प्रावधान नहीं किए गए हैं। असहाय वृद्धजनों का स्तर ऊंचा करने के लिए भी योजनाएं बननी चाहिए। कई स्थानों पर बच्चे बूढ़े मां-बाप को छोड़कर अन्यत्र बस चुके हैं, सरकार को इनकी तरफ भी नजरें इनायत करनी चाहिए थी।
पितांबर दत्त भट्ट, बुजुर्ग धनखलगांव।
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फोटो: 01 आरकेटी 05पी: राजेंद्र बिष्ट, 06पी:जगदीश पपने, 07पी: एचजेबी सिंह, 08पी: पितांबर दत्त भट्ट