अल्मोड़ा। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल के इस्तीफे के एलान से कांग्रेस में हलचल है। कुंजवाल अपने स्टैंड पर बरकरार हैं। समाधान के लिए उनके द्वारा दी गई समय सीमा कल 15 अगस्त को समाप्त हो रही है और अगर कल तक मामला नहीं सुलझा तो 16 अगस्त को कुंजवाल पार्टी से इस्तीफे का एलान कर सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक मंगलवार को कुंजवाल से प्रदेश प्रभारी अनुग्रह नारायण सिंह, प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह और नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने फोन पर बात की और उन्हें समझाने का प्रयास किया। यह भी पता चला है कि कांग्रेस नेतृत्व कुंजवाल द्वारा उठाए गए कुछ मुद्दों को लेकर कल 15 अगस्त तक कुछ फैसला कर सकता है।
बता दें कि अल्मोड़ा कांग्रेस जिलाध्यक्ष की नियुक्ति सहित कुछ अन्य मुद्दों को लेकर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और जागेश्वर के विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल नाराज चल रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक कुंजवाल ने तय किया है कि अगर उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों का 15 अगस्त तक समाधान नहीं किया गया तो वह 16 अगस्त को अल्मोड़ा में पत्रकार वार्ता आयोजित करके पार्टी से इस्तीफे का एलान कर देंगे। साथ ही वह असंतोष के कारणों को भी खुलकर मीडिया के सामने रखेंगे। कुंजवाल के निकटस्थ सूत्रों के मुताबिक उन्होंने यह तय किया है कि अगर पार्टी ने उनका इस्तीफा मंजूर कर दिया तो वह विधानसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा दे देंगे। सूत्रों के अनुसार यदि पार्टी ने इस्तीफा मंजूर नहीं किया और उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों का कोई समाधान नहीं किया तो वह राजनीति से सन्यास का एलान भी कर सकते हैं।
इधर जानकारी मिली है कि मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस प्रभारी अनुग्रह नारायण सिंह, प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह और नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने कुंजवाल से फोन पर बात करके इस्तीफे के निर्णय को वापस लेने का आग्रह किया। सूत्रों के मुताबिक कुंजवाल ने तीनों नेताओं से अल्मोड़ा के साथ ही चंपावत के जिलाध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर भी सवाल उठाए। सूत्रों के मुताबिक कुंजवाल ने इन नेताओं से हुई बातचीत में महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिए जाने और जातीय संतुलन को लेकर भी असंतोष जताया। तीनों नेताओं ने कुंजवाल को उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों का समाधान निकालने का आश्वासन दिया, लेकिन बताया गया है कि फिलहाल कुंजवाल संतुष्ट नहीं हैं। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस नेतृत्व कुंजवाल द्वारा उठाए गए कुछ मुद्दों को लेकर 15 अगस्त तक कुछ फैसला कर सकता है ताकि कुंजवाल को मनाया जा सके।