अल्मोड़ा। महिला हाट संस्था की ओर से ग्रामीण तकनीकी परिसर कोसी में एकल महिला नेतृत्व विकास कार्यशाला आयोजित की गई। आस्था संस्थान उदयपुर (राजस्थान) की चंद्रकला ने कहा कि अकेले रहते हुए महिलाओं की बात कोई नहीं सुनता है। यदि महिलाएं संगठित हो जाती हैं तो उसका असर अधिक होता है। एकल महिलाएं संगठित होकर अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें।
उन्होंने बताया कि राजस्थान के गांवों में महिलाएं बहुत संगठित हैं और नेतृत्व में भी आगे हैं। महिला हाट संस्था की सचिव कृष्णा बिष्ट ने कहा कि एकल महिलाओं को सशक्त बनाकर उन्हें उनके अधिकारों के प्रति सजग करने को संस्था प्रयासरत है, ताकि वे अपने हक के प्रति जागरूक हों। संस्था एकल नारी शक्ति संगठन बनाकर अकेली महिलओं के हित में कार्य किया जा रहा है। वर्तमान में संगठन की सदस्य संख्या 550 है।
ग्राम विकास अधिकारी रमेश राज ने एकल महिलाओं के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रहीं योजनाओं की जानकारी दी। प्रधान देवेंद्र नयाल ने कहा कि महिलाएं ग्राम पंचायत की बैठक में अवश्य भाग लें और अपनी समस्याएं रखें। ग्राम स्तर पर किसी कारण समस्याएं नहीं सुनी जाती हैं तो इसकी शिकायत जिलाधिकारी से की जा सकती है।
अधिवक्ता सुनीता पांडे ने एकल महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में बताया और कहा कि एकल महिलाओं के लिए कानून में भी कई अधिकार हैं। कार्यशाला में एकल नारी शक्ति संगठन की सचिव कमला तिवारी, उपाध्यक्ष ऊषा देवी, कोषाध्यक्ष सुनीता बजेली, गंगा भंडारी, हेमा किरौला, संध्या जलाल, लज्जा देवी, हीरा, उमा रजवार, राधा, पुष्पा देवी के अलावा महिला हाट की गीता देवी, राजू कांडपाल, पुष्पा टम्टा, संजय कुमार आदि मौजूद थे।