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ट्रचिंग ग्राउंड निर्माण में वन अधिनियम का अड़ंगा

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अल्मोड़ा। शहर में कूड़ा निस्तारण के लिए ट्रंचिंग ग्राउंड के निर्माण को वन भूमि की स्वीकृति नहीं मिल सकी है। जिससे अब तक ट्रंचिंग ग्राउंड अस्तित्व में नहीं आ सका है। हालांकि पालिका परिषद ने बल्ढोटी में सड़क के किनारे कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था की है।
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शहर से प्रतिदिन दस टन कूड़ा निकलता है। कूड़े को पिथौरागढ़ मार्ग पर बल्ढोटी में डंपिंग जोन में डाला जाता है। पर इस स्थान पर ट्रंचिग ग्राउंड का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। जिसे इस स्थान परा काफी दुर्गंध उठती है। राहगीरों और वाहनों से आने-जाने वाले लोगों को इस स्थान पर दुर्गंध के चलते मुंह पर रुमाल रखकर गुजरना पड़ता है। इसी से लगी 0.9 हेक्टेयर जमीन को वन भूमि की अब तक स्वीकृति नहीं मिल सकी है।

पालिका परिषद का कूड़े के निस्तारण के लिए जीरो वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी से अनुबंध किया है। कंपनी ने गीले कूड़े से खाद बनाने के लिए दो कंपोस्टर वहां स्थापित किए हैं, साथ ही गीले और सूखे कूड़े की छंटाई के लिए ट्रोमिल मशीन भी लगा रखी है।
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कांपेक्टर भी स्थापित कर रखा है पर पर्याप्त भूमि की व्यवस्था नहीं होने से ट्रंचिंग ग्राउंड धरातल पर नहीं उतर सका है। पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी ने बताया कि डंपिंग जोन में 78 मीटर चहारदीवारी का का निर्माण कर लिया गया है। दो गेट बनाए गए हैं। पानी की लाइन बिछाई जा रही है। जैविक खाद बनाने का काम शुरु कर दिया गया है, जबकि गत्ता, पॉलिथीन, प्लास्टिक, बोतल आदि की बिक्री से पालिका परिषद को अब तक 66 हजार रुपये की आय हुई है। परंतु डंपिंग जोन से लगी चयनित 0.9 हेक्टेयर भूमि को वन भूमि की स्वीकृति नहीं मिल सकी है।
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