तहसील मुख्यालय से करीब नौ किमी दूर ग्वांसा पुल में भूस्खलन की चपेट में आकर मलबे में दबे युवक का शव निकालने में प्रशासन को 16 घंटे लग गए। इस हादसे ने एक बार फिर आपदा प्रबंधन की पोल खोलकर रख दी है। शव निकालने में हुई देरी से क्षेत्रवासियों में शासन-प्रशासन के प्रति रोष व्याप्त है।
बुधवार की शाम भूस्खलन की चपेट में आने से ईश्वर दास (32) पुत्र दौलत दास निवासी सुजऊ मोहना मलबे में दब गया था। तहसील में आपदा प्रबंधन के इंतजाम न होने के कारण राहत बचाव कार्य नहीं चलाया जा सका। प्रशासन को साहिया से लोनिवि की जेसीबी मंगानी पड़ी।
अंधेरा होने के कारण रात में मलबा हटाने का काम शुरू नहीं हो सका। जिसके चलते पूरे 16 घंटे बाद बृहस्पतिवार सुबह नौ बजे शव को मलबे से बाहर निकाला गया।
स्थानीय निवासी श्यामदत्त जोशी, जयदत्त, चंदन सिंह चौहान का कहना है कि आपदा की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र होने के बावजूद प्रशासन गंभीर नहीं रहता है। हर बार आपदा प्रबंधन नाकाम साबित होता है। नायब तहसीलदार दौलत दास ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। मुआवजे की रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी गई है।
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