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गांधी सरोवर बना केदारनाथ के लिए खतरा

Sun, 23 Jun 2013 12:25 PM IST
देहरादून/ब्यूरो
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जिस गांधी सरोवर की वजह से केदारनाथ धाम में तबाही मची वही सरोवर अब केदारनाथ मंदिर के लिए खतरा बन गया है। अब जब भी बारिश होगी सरोवर का पानी मलबे के साथ मंदिर की तरफ ही आएगा।
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क्योंकि पानी ने अपना पुराना रास्ता बदलकर नया बना लिया है, जो मंदिर की तरफ ही जाता है। ऐसे में जब तक वैज्ञानिक अध्ययन कराकर मंदिर की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किये जाते तब तक धाम में पूजा-अर्चना शुरू हो पाना संभव नहीं है।

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इस तथ्य से नेशनल इंस्टीट्यूट आफ डिजास्टर मैनेजमेंट (एनआईडीएम) के वैज्ञानिक भी इनकार नहीं कर रहे।

पहले भी पानी भरता था

केदारनाथ धाम के ऊपर स्थित गांधी सरोवर में पहले भी पानी भरता था, लेकिन आगे जाकर वह दाहिनी ओर मुड़ जाता था। जहां से पानी मुड़ता था, वहां पर सैकड़ों साल से बोल्डर पड़े थे। यही बोल्डर केदारनाथ मंदिर के लिए सुरक्षा कवच का काम करते थे।
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वर्षों से यही बोल्डर मंदिर को सुरक्षित रखे हुए थे, लेकिन 15 जून की रात को जिस तरह से गांधी सरोवर से निकलकर पानी ने बोल्डरों को तोड़ा उसी से वहां पर तबाही मची। अब यहां भविष्य के लिए भी खतरा पैदा हो गया है।

पुनर्वास करना भी मुश्किल होगा
केदारनाथ, रामबाड़ा और गौरीकुंड में पुनर्वास करना भी मुश्किल होगा। क्योंकि पानी ने जो नया रास्ता बनाया है अब वह हर बारिश में उसी रास्ते से बहेगा। जब तक पानी के इस रास्ते को नहीं मोड़ा जाएगा तब तक केदारनाथ धाम में पूजा-अर्चना करना मुश्किल होगा।

जिस तरह से गांधी सरोवर टूटा है उससे भविष्य के लिए खतरा पैदा हो गया है। सेटेलाइट से इसकी वास्तविक स्थिति जानने की कोशिश की जा रही है। इस सवाल का भी जवाब तलाशा जा रहा है कि सरोवर क्यों टूटा। पानी का प्राकृतिक रास्ता क्यों बंद हुआ। हवाई सर्वे की भी जरूरत है। जब तक पानी के रास्ते को बंद नहीं किया जाता, तब तक केदारनाथ में किसी प्रकार की मानवीय गतिविधियां नहीं की जानी चाहिए।
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- डा. चंदन घोष, प्रोफेशन इन हेड, एनआईडीएम
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