हजारों परिवारों की उम्मीद अब टूटने लगी है, क्योंकि उत्तराखंड सरकार ने उन 5,500 से 6,000 लोगों को आधिकारिक रूप से मृत मानने की तैयारी कर ली है, जो महीने भर पहले मची तबाही में गुम हो गए।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा कि 18 राज्यों के 5,700 से ज्यादा लोगों को 'मृत माना जाएगा', ताकि लेकिन लापता लोगों की तलाश जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य के निवासी, जो इस आपदा में लापता हैं उनके परिजनों को इस बांड के आधार पर पांच लाख की आर्थिक मदद दी जाएगी। इस मदद में साढ़े तीन लाख केंद्र के होंगे, जबकि डेढ़ लाख राज्य सरकार दे रही है।
उन्होंने कहा, 'सभी राज्यों के प्रमुख सचिवों को मृतकों की सूची भेज दी जाएगी।'
उत्तर प्रदेश से सबसे ज्यादा लोग लापता हैं। तबाही में लापता हुए इस राज्य के कम से कम 2,000 लोगों का अब तक कोई अता-पता नहीं है। इसके बाद मध्य प्रदेश का नंबर आता है, जहां के 1,000 से ज्यादा लोगों की जानकारी नहीं मिली है।
इसके अलावा राजस्थान, दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात और हरियाणा से भी कई लापता हैं।
उत्तराखंड में ज्यादातर मौतें केदारनाथ और गौरीकुंड के बीच हुई हैं। राहत और बचाव कार्य के प्रभारी प्रधान सचिव राकेश शर्मा ने कहा, 'हम जानते हैं कि उस रोज केदारनाथ में कितने लोग थे। हमें यह भी अंदाजा है कि रामबाड़ा में भी सामान्य तौर पर कितने लोग रहते हैं, जहां अधिकतर मौतें हुईं।'
उत्तराखंड में दोबारा स्कूल खुले हैं, लेकिन अब भी 30 गांव कटे हुए हैं, जिससे राहत पहुंचाने में दिक्कतें पेश आ रही हैं।
राज्य सरकार का कहना है कि केदारनाथ जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए वैकल्पिक मार्ग बनाने की बात सेना ने कही थी, लेकिन यह विचार व्यावहारिक नहीं जान पड़ता।